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रिटायरमेंट के बाद 50 वर्षों का जीवन: विशेषज्ञों ने दी दीर्घायु क्रांति पर नई चेतावनी

ICN24 Newsroom 12 जून 2026, 03:00 am
रिटायरमेंट के बाद 50 वर्षों का जीवन: विशेषज्ञों ने दी दीर्घायु क्रांति पर नई चेतावनी

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन रिटायरमेंट सिक्योरिटी के नए पॉडकास्ट में विशेषज्ञ केन डिकवाल्ड ने बढ़ती उम्र और लंबी सेवानिवृत्ति के वित्तीय और सामाजिक प्रभावों पर चर्चा की है।

वाशिंगटन स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन रिटायरमेंट सिक्योरिटी (NIRS) ने अपने नए पॉडकास्ट 'रिटायरमेंट इन अमेरिका' का दूसरा एपिसोड जारी किया है, जिसमें सेवानिवृत्ति के बदलते स्वरूप पर गंभीर चर्चा की गई है। इस कड़ी का शीर्षक 'क्या होता है जब रिटायरमेंट 30, 40 या 50 साल तक चलता है?' रखा गया है। इसमें प्रसिद्ध उम्रदराज विशेषज्ञ और 'एज वेव' के संस्थापक डॉ. केन डिकवाल्ड ने बढ़ती उम्र की इस 'दीर्घायु क्रांति' (Longevity Revolution) से जुड़ी चुनौतियों और संभावनाओं पर प्रकाश डाला है। डॉ. डिकवाल्ड के अनुसार, आधुनिक चिकित्सा और जीवनशैली में सुधार के कारण अब लोग पहले की तुलना में कहीं अधिक लंबे समय तक जीवित रह रहे हैं। यह स्थिति उन पारंपरिक वित्तीय मॉडलों के लिए एक बड़ी चुनौती है, जो केवल 15 से 20 वर्षों की सेवानिवृत्ति को ध्यान में रखकर बनाए गए थे। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह विषय विशेष रूप से प्रासंगिक है, क्योंकि वहां भारतीय प्रवासियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और वे एक सुरक्षित भविष्य की योजना बना रहे हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय में अक्सर परिवार की वित्तीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य देखभाल के खर्च और बचत की कमी एक गंभीर मुद्दा बन सकती है। पॉडकास्ट में यह बताया गया है कि यदि कोई व्यक्ति 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होता है और 100 वर्ष तक जीवित रहता है, तो उसे 40 वर्षों के खर्चों के लिए एक ठोस रणनीति की आवश्यकता होगी। इसमें न केवल पेंशन और सुपरएन्युएशन की भूमिका महत्वपूर्ण है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक जुड़ाव भी उतने ही आवश्यक हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हमें 'रिटायरमेंट' शब्द को फिर से परिभाषित करने की आवश्यकता है। अब यह केवल काम से छुट्टी लेने के बारे में नहीं है, बल्कि जीवन के एक नए और लंबे अध्याय की शुरुआत है। डॉ. डिकवाल्ड ने सुझाव दिया है कि इस लंबी अवधि में लोगों को अंशकालिक काम, स्वयंसेवा या नई शिक्षा प्राप्त करने जैसे विकल्पों पर विचार करना चाहिए ताकि वे सक्रिय रह सकें। पॉडकास्ट में नीति निर्माताओं को भी चेतावनी दी गई है कि सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों को इस नए जनसांख्यिकीय बदलाव के अनुरूप ढालना होगा। बढ़ती उम्र की आबादी के लिए बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश करना अनिवार्य हो गया है। भारतीय प्रवासियों के लिए, जो अक्सर अपने बुढ़ापे की योजना भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों देशों के बीच तालमेल बिठाकर करते हैं, यह चर्चा निवेश के नए नजरिए की मांग करती है।
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