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बिहार के गया में अनोखा परिवार: बच्चों के नाम विदेशी देशों, भाषाओं और राजनीतिक दलों पर रखे

ICN24 Newsroom 13 अग॰ 2026, 03:37 am
बिहार के गया में अनोखा परिवार: बच्चों के नाम विदेशी देशों, भाषाओं और राजनीतिक दलों पर रखे

बिहार के गया जिले में एक परिवार अपने बच्चों के अनूठे नामकरण को लेकर चर्चा में है, जहां बच्चों के नाम देशों और राजनीतिक दलों पर रखे गए हैं।

भारत की विविधता अक्सर इसकी परंपराओं और रीति-रिवाजों में झलकती है, लेकिन बिहार के गया जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने आधुनिक नामकरण की परिभाषा ही बदल दी है। गया के एक छोटे से गांव में रहने वाले एक परिवार ने अपने बच्चों के नाम किसी देवी-देवता या पारंपरिक पूर्वजों के नाम पर रखने के बजाय वैश्विक भूगोल, भाषाओं और राजनीतिक विचारधाराओं पर रखे हैं। यह अनूठी पहल न केवल स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से अब दुनिया भर के प्रवासी भारतीयों का ध्यान भी खींच रही है। इस परिवार में बच्चों के नाम 'जापान', 'मलेशिया', 'रूस' जैसे देशों के नाम पर हैं, तो कुछ के नाम 'अंग्रेजी' जैसी भाषाओं और प्रमुख राजनीतिक दलों के नाम पर रखे गए हैं। परिवार के बड़ों का मानना है कि इस तरह के नाम रखने से बच्चों में बचपन से ही दुनिया के प्रति एक व्यापक दृष्टिकोण विकसित होता है। उनका तर्क है कि जब कोई बच्चा किसी देश का नाम धारण करता है, तो वह अनजाने में ही उस स्थान की संस्कृति और भूगोल के प्रति जिज्ञासु हो जाता है। पड़ोसी गांवों के लोग इस परिवार की इस अनोखी पसंद को देखकर हैरान हैं। शुरुआत में जब इन नामों का खुलासा हुआ, तो ग्रामीणों को यह थोड़ा अजीब लगा, लेकिन समय के साथ यह इस गांव की पहचान बन गई है। स्कूल के शिक्षकों और स्थानीय प्रशासन के लिए भी ये नाम शुरुआत में एक चुनौती थे, लेकिन अब वे भी इस अनूठी परंपरा के अभ्यस्त हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परिवार अपनी शिक्षा और आधुनिक सोच के लिए जाना जाता है और वे रूढ़िवादिता को तोड़ना चाहते थे। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष रूप से रोचक है। विदेशों में रहने वाले भारतीय अक्सर अपनी पहचान को लेकर सजग रहते हैं और बच्चों के नाम रखते समय इस बात का ध्यान रखते हैं कि वे नाम उनकी जड़ों से भी जुड़े हों और विदेशी परिवेश में भी आसानी से बोले जा सकें। गया के इस परिवार ने इसके बिल्कुल विपरीत रुख अपनाया है, जहां भारत के भीतर रहते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पहचान को अपने घर में जगह दी है। समाजशास्त्रियों का मानना है कि इस तरह का नामकरण वैश्वीकरण के बढ़ते प्रभाव और सूचना क्रांति का परिणाम है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब लोग वैश्विक स्तर पर हो रहे बदलावों से अवगत हैं। गया का यह 'ग्लोबल' परिवार इसी बदलाव का एक जीता-जागता उदाहरण है। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि एक नाम केवल एक पहचान नहीं है, बल्कि यह एक विचार और दुनिया को देखने का एक नजरिया भी हो सकता है।
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