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भारतीय शेयर बाजार में हलचल: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव के बीच सेंसेक्स और निफ्टी लुढ़के
ICN24 Newsroom 12 अग॰ 2026, 08:37 pm

शुरुआती बढ़त के बाद भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। मध्य पूर्व में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
भारतीय शेयर बाजार में आज काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दिन की शुरुआत मजबूती के साथ करने के बाद, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी मामूली गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार में आई इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव बताया जा रहा है, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों के उत्साह को ठंडा कर दिया है।
कारोबारी सत्र के दौरान कुछ चुनिंदा शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। पिकाडिली एग्रो (Piccadily Agro), सेंको गोल्ड (Senco Gold) और गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसे शेयरों में 10% से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई। इन कंपनियों के शेयरों में आई कमजोरी ने सूचकांकों पर दबाव बनाने का काम किया। हालांकि, आईटी (IT) क्षेत्र के शेयरों ने बाजार को कुछ सहारा देने की कोशिश की, जिससे गिरावट की तीव्रता थोड़ी कम रही। इंफोसिस और टीसीएस जैसे प्रमुख आईटी शेयरों में खरीदारी की वजह से बाजार को निचले स्तरों पर कुछ समर्थन मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि भारत जैसी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, वहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता सीधे तौर पर भारत के व्यापार घाटे और मुद्रास्फीति पर असर डाल सकती है। यही कारण है कि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने आज सावधानी बरतने का फैसला किया।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के निवेशकों के लिए यह बाजार हलचल काफी महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में बसे कई अनिवासी भारतीय (NRI) सीधे तौर पर एनआरई (NRE) या एनआरओ (NRO) खातों के माध्यम से भारतीय इक्विटी बाजार में निवेश करते हैं। भारतीय शेयर बाजार में आने वाली इस तरह की अस्थिरता उनकी निवेश योजनाओं और पोर्टफोलियो के मूल्य को प्रभावित करती है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में स्थित निवेश सलाहकारों का मानना है कि मौजूदा स्थिति में निवेशकों को घबराने के बजाय लंबी अवधि के दृष्टिकोण पर ध्यान देना चाहिए।
तकनीकी मोर्चे पर, निफ्टी अब एक महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल के करीब कारोबार कर रहा है। यदि भू-राजनीतिक तनाव में कमी आती है और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर होती हैं, तो बाजार में रिकवरी की संभावना बन सकती है। फिलहाल, सभी की निगाहें अंतरराष्ट्रीय बाजार और आगामी तिमाही नतीजों पर टिकी हैं। ऑस्ट्रेलिया-भारत व्यापार गलियारे में सक्रिय कारोबारियों के लिए, बाजार की यह स्थिति मुद्रा विनिमय दरों (Currency Exchange Rates) में भी बदलाव ला सकती है, जो सीधे तौर पर भारत भेजे जाने वाले धन (Remittance) को प्रभावित करेगी।
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