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कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु की याचिका पर 17 अगस्त को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

ICN24 Newsroom 12 अग॰ 2026, 11:37 pm
कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु की याचिका पर 17 अगस्त को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी जल विवाद मामले में तमिलनाडु की याचिका पर 17 अगस्त को सुनवाई करने का निर्णय लिया है, जिसमें कर्नाटक से पानी छोड़ने की मांग की गई है।

भारत के उच्चतम न्यायालय ने कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच चल रहे लंबे कानूनी विवाद में एक महत्वपूर्ण तारीख तय की है। तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर एक याचिका पर अब 17 अगस्त को सुनवाई की जाएगी। इस याचिका में कर्नाटक सरकार को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के निर्देशों का पालन करने और तमिलनाडु के लिए निर्धारित पानी का हिस्सा तुरंत छोड़ने का निर्देश देने की मांग की गई है। शुरुआत में इस मामले की सुनवाई पहले होनी थी, लेकिन पीठ के एक न्यायाधीश के स्वास्थ्य कारणों से इसे स्थगित करना पड़ा था। अब शीर्ष अदालत इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर विस्तृत दलीलें सुनेगी। तमिलनाडु का तर्क है कि कर्नाटक द्वारा पानी न छोड़े जाने के कारण राज्य के डेल्टा क्षेत्रों में खड़ी फसलें सूख रही हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। कावेरी जल विवाद केवल एक कानूनी लड़ाई नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की आजीविका और दो पड़ोसी राज्यों के बीच के संबंधों से जुड़ा एक संवेदनशील मुद्दा है। तमिलनाडु सरकार का कहना है कि कर्नाटक ने मानसून की कमी का हवाला देते हुए पानी रोकने का जो फैसला लिया है, वह CWMA द्वारा तय किए गए संकट-कालीन फॉर्मूले का उल्लंघन है। दूसरी ओर, कर्नाटक का रुख रहा है कि उसके अपने जलाशयों में जल स्तर काफी कम है और उसे बेंगलुरु जैसे शहरों में पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करनी है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से तमिलनाडु और कर्नाटक से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए यह खबर काफी महत्व रखती है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई अक्सर अपने पैतृक गांवों के कृषि संकट और पानी की समस्याओं को लेकर चिंतित रहते हैं। इस समुदाय के कई सदस्य प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भारत में खेती-किसानी से जुड़े हैं और वहां होने वाली ऐसी घटनाओं का उनके पारिवारिक निवेश और सामाजिक संबंधों पर गहरा असर पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई में यह देखा जाएगा कि क्या न्यायालय कर्नाटक को किसी तात्कालिक राहत के तौर पर पानी छोड़ने का निर्देश देता है या फिर वह CWMA को स्थिति की नई समीक्षा करने का आदेश देता है। फिलहाल, दोनों राज्यों की निगाहें 17 अगस्त को होने वाली कार्यवाही पर टिकी हैं, जो दक्षिण भारत की इस 'जीवन रेखा' के भविष्य का फैसला कर सकती है।
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