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महिलाओं को सीपीआर देने में हिचकिचाहट: क्यों ट्रेनिंग डमी का 'पुरुष' होना जानलेवा साबित हो रहा है?

ICN24 Newsroom 10 अग॰ 2026, 06:38 pm
महिलाओं को सीपीआर देने में हिचकिचाहट: क्यों ट्रेनिंग डमी का 'पुरुष' होना जानलेवा साबित हो रहा है?

सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं को कार्डियक अरेस्ट के दौरान मदद मिलने की संभावना कम होती है। शोध के अनुसार, पुरुष डमी पर आधारित ट्रेनिंग और सामाजिक संकोच इसके मुख्य कारण हैं।

ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया भर में हृदय रोग स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। जब किसी व्यक्ति का दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है (कार्डियक अरेस्ट), तो शुरुआती कुछ मिनट बेहद कीमती होते हैं। इस दौरान दी जाने वाली सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) तकनीक जान बचाने में सबसे प्रभावी होती है। हालांकि, हालिया शोध और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी एक डराने वाले अंतर की ओर इशारा करती है: सार्वजनिक स्थानों पर पुरुषों की तुलना में महिलाओं को सीपीआर मिलने की संभावना बहुत कम होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस 'जेंडर गैप' के पीछे का एक बड़ा कारण चिकित्सा जगत में दशकों से इस्तेमाल की जा रही 'पुरुष' डमी (Manikin) हैं। अधिकांश प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) कोर्स में इस्तेमाल होने वाली डमी सपाट छाती वाली होती हैं, जो शारीरिक रूप से पुरुषों जैसी दिखती हैं। जब लोग केवल पुरुष डमी पर अभ्यास करते हैं, तो वे वास्तविक स्थिति में एक महिला के शरीर की संरचना (ब्रेस्ट टिश्यू और ब्रा जैसे कपड़े) के साथ सामंजस्य नहीं बैठा पाते। ऑस्ट्रेलिया में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रशिक्षण में विविधता की कमी के कारण लोग अनजाने में यह मान लेते हैं कि सीपीआर केवल पुरुषों के लिए है या महिलाओं को इसे देने का तरीका अलग हो सकता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के संदर्भ में यह समस्या और भी जटिल हो जाती है। सांस्कृतिक संवेदनशीलता और महिलाओं की शारीरिक गरिमा को लेकर सामाजिक वर्जनाएं अक्सर बाधा बनती हैं। कई बार पुरुष राहगीर किसी अनजान महिला को छूने या उसके कपड़े हटाने में संकोच करते हैं, क्योंकि उन्हें डर होता है कि उनकी मदद को गलत समझा जा सकता है या उन पर अनुचित व्यवहार का आरोप लग सकता है। यह 'हिचकिचाहट' जानलेवा साबित होती है। चिकित्सा विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में समय बर्बाद करना मौत को बुलावा देना है। अध्ययनों से पता चलता है कि लोगों को यह डर भी सताता है कि वे महिला की पसलियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं या उनके निजी अंगों को अनजाने में छू सकते हैं। इसी डर को दूर करने के लिए अब ट्रेनिंग में 'फीमेल डमी' या डमी पर महिला स्वरूप वाले अटैचमेंट का उपयोग करने की मांग बढ़ रही है। इसका उद्देश्य लोगों को महिला के शरीर पर सही दबाव (Compression) देने और कपड़ों के बावजूद जीवन रक्षक तकनीक अपनाने में सहज बनाना है। ऑस्ट्रेलिया में 'गुड सेमेरिटन' (Good Samaritan) कानून मौजूद हैं, जो नेकनीयती से मदद करने वाले व्यक्ति को कानूनी सुरक्षा प्रदान करते हैं। भारतीय समुदाय के सदस्यों को जागरूक होना चाहिए कि आपात स्थिति में मदद करना किसी भी सामाजिक संकोच से ऊपर है। यदि कोई महिला बेहोश होकर गिरती है और उसकी सांसें नहीं चल रही हैं, तो तत्काल एम्बुलेंस को कॉल करें और बिना डरे सीपीआर शुरू करें। जान बचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए, और इसके लिए हमें अपनी ट्रेनिंग और सोच दोनों में बदलाव करने की जरूरत है।
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