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प्रवासी मजदूरों को नहीं किया जा सकता आवास योजना से वंचित: केंद्र सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण

ICN24 Newsroom 12 जून 2026, 01:00 am
प्रवासी मजदूरों को नहीं किया जा सकता आवास योजना से वंचित: केंद्र सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि काम के लिए दूसरे शहरों में प्रवास करने वाले मजदूरों को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण में कहा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत पात्र लाभार्थी सिर्फ इसलिए पक्के घर की सुविधा से वंचित नहीं किए जा सकते कि वे रोजगार की तलाश में अस्थायी रूप से अपने पैतृक गांव से बाहर रह रहे हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने यह जानकारी केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) को दी है। यह स्पष्टीकरण सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दायर एक अपील की सुनवाई के दौरान आया। मंत्रालय ने आयोग को सूचित किया कि ऐसा कोई नियम या सर्कुलर मौजूद नहीं है जो प्रवासी मजदूरों को उनके मूल निवास स्थान पर नहीं होने के आधार पर योजना के लाभों से रोकता हो। यह खबर उन लाखों भारतीय परिवारों के लिए राहत भरी है जो बेहतर आजीविका की तलाश में आंतरिक या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रवास करते हैं। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि PMAY-G के तहत लाभार्थियों की पात्रता का निर्धारण सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) 2011 के आंकड़ों और ग्राम सभाओं द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन के आधार पर किया जाता है। योजना का मुख्य उद्देश्य उन ग्रामीण परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है जो बेघर हैं या कच्चे घरों में रह रहे हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यदि कोई परिवार मजदूरी या रोजगार के उद्देश्यों से अस्थायी रूप से बाहर रह रहा है, तो उनकी पात्रता स्वतः समाप्त नहीं हो जाती। सूचना आयुक्त खुशवंत सिंह सेठी ने सुनवाई के दौरान मंत्रालय के रुख को दर्ज किया। आयोग ने ग्रामीण विकास मंत्रालय और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को निर्देश दिया है कि वे अपीलकर्ता को सभी प्रासंगिक नीतियों, नियमों और वेबसाइट लिंक के साथ एक संशोधित विस्तृत उत्तर प्रदान करें। यह आदेश उन भ्रांतियों को दूर करने में सहायक होगा जहाँ स्थानीय अधिकारी प्रवास को अपात्रता का आधार मान लेते थे। प्रवास भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक अभिन्न हिस्सा है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के संदर्भ में देखें तो यह स्पष्टीकरण सरकारी योजनाओं में 'निवास' की परिभाषा को लेकर एक बड़ी पारदर्शिता लाता है। भारत सरकार ने यह साफ कर दिया है कि केंद्र द्वारा निर्धारित मानदंडों का पालन राज्य सरकारों को करना होगा, जो इस योजना के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार हैं। यह कदम सरकार के 'सभी के लिए आवास' के संकल्प को सुदृढ़ करता है। उन परिवारों के लिए जो साल के कुछ महीने अपने गांवों से दूर शहरों में काम करते हैं, अब पक्के घर का सपना अधूरा नहीं रहेगा। मंत्रालय ने यह भी जोड़ा कि अपीलीय प्रक्रिया और ग्राम सभा का सत्यापन यह सुनिश्चित करने के लिए है कि सहायता सही हाथों में पहुंचे।
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