ऑस्ट्रेलिया
स्ट्रैटसिस और लिम्बिटलेस सॉल्यूशंस की साझेदारी का विस्तार: 3D प्रिंटिंग तकनीक से दिव्यांग बच्चों को मिल रहे आधुनिक कृत्रिम अंग
ICN24 Newsroom 19 अग॰ 2026, 08:37 am

स्ट्रैटसिस और लिम्बिटलेस सॉल्यूशंस ने अपनी 12 साल पुरानी साझेदारी को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिससे 3D प्रिंटिंग के माध्यम से दिव्यांग बच्चों को किफायती और सुंदर कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए जा सकेंगे।
3D प्रिंटिंग तकनीक की दुनिया में अग्रणी कंपनी 'स्ट्रैटसिस' (Stratasys) और गैर-लाभकारी संस्था 'लिम्बिटलेस सॉल्यूशंस' (Limbitless Solutions) ने अपनी 12 साल पुरानी सफल साझेदारी के विस्तार की घोषणा की है। इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य अत्याधुनिक 3D प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग करके उन दिव्यांग बच्चों को कृत्रिम अंग (Prosthetics) प्रदान करना है, जिन्हें जन्मजात या किसी दुर्घटना के कारण अंगों की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
पिछले एक दशक से अधिक समय में, इस साझेदारी ने सैकड़ों बच्चों के जीवन को बदला है। ये कृत्रिम अंग न केवल कार्यात्मक रूप से उन्नत हैं, बल्कि इन्हें बच्चों की पसंद के अनुसार अनुकूलित (Customized) भी किया जा सकता है। ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित स्वास्थ्य सेवा वाले देशों में रहने वाले भारतीय मूल के परिवारों के लिए यह तकनीक एक नई उम्मीद लेकर आई है। अक्सर महंगे और भारी पारंपरिक कृत्रिम अंगों की तुलना में, 3D प्रिंटेड अंग हल्के, किफायती और बच्चों के लिए उपयोग में आसान होते हैं।
लिम्बिटलेस सॉल्यूशंस, जो फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा शुरू की गई एक पहल थी, स्ट्रैटसिस की 'पॉलीजेट' (PolyJet) तकनीक का उपयोग करती है। यह तकनीक अंगों को सजीव रंग और फिनिश देने में सक्षम है, जिससे ये अंग केवल 'मेडिकल उपकरण' न लगकर बच्चों के व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाते हैं। उदाहरण के लिए, कई बच्चे इन्हें 'सुपरहीरो आर्म्स' के रूप में देखते हैं, जो उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय के लिए, विशेष रूप से चिकित्सा और इंजीनियरिंग क्षेत्र में काम कर रहे पेशेवरों के लिए, यह विकास नवाचार और मानवीय सेवा के संगम का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में, जहाँ भारतीय प्रवासियों की बड़ी आबादी है, स्वास्थ्य तकनीक में होने वाले ऐसे बदलाव सीधे तौर पर सामुदायिक कल्याण को प्रभावित करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तकनीक से भविष्य में कृत्रिम अंगों की लागत में भारी कमी आएगी, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए इसे अपनाना सरल होगा।
साझेदारी के अगले चरण में, दोनों संगठन उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए डिज़ाइनों पर काम करने की योजना बना रहे हैं। स्ट्रैटसिस ने प्रतिबद्धता जताई है कि वे लिम्बिटलेस सॉल्यूशंस को अपनी नवीनतम मशीनों और सामग्री तक पहुंच प्रदान करना जारी रखेंगे। इसका उद्देश्य न केवल अंग प्रदान करना है, बल्कि बच्चों को समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से सशक्त बनाना भी है।
अंततः, यह पहल यह सिद्ध करती है कि तकनीक का सही उपयोग सामाजिक चुनौतियों का समाधान कर सकता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय, जो शिक्षा और स्टेम (STEM) क्षेत्रों को अत्यधिक महत्व देता है, के लिए यह कहानी प्रेरणादायक है कि कैसे इंजीनियरिंग के छात्र और बड़ी कंपनियां मिलकर वैश्विक स्तर पर मानवता की सेवा कर सकते हैं।
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