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भारत ने क्लियर फ्लोट ग्लास पर लगाया न्यूनतम आयात मूल्य; सेंट-गोबेन और असाही इंडिया जैसे घरेलू दिग्गजों को मिलेगी मजबूती
ICN24 Newsroom 19 अग॰ 2026, 03:37 am

भारत सरकार ने क्लियर फ्लोट ग्लास के आयात पर ₹34,000 प्रति टन का न्यूनतम मूल्य निर्धारित किया है, जिससे घरेलू निर्माताओं को सस्ते विदेशी माल से राहत मिलेगी।
भारत सरकार ने घरेलू कांच उद्योग को सशक्त बनाने और सस्ते आयात पर लगाम लगाने के उद्देश्य से एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा 18 अगस्त को जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, 4 मिमी से 12 मिमी मोटाई वाले क्लियर फ्लोट ग्लास के आयात के लिए अब न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) निर्धारित कर दिया गया है। इस निर्णय से मुख्य रूप से सेंट-गोबेन (Saint-Gobain) और असाही इंडिया ग्लास (Asahi India Glass) जैसी बड़ी कंपनियों को लाभ होने की उम्मीद है।
नई नीति के तहत, आईटीसी (एचएस) कोड 70051090 और 70052990 के अंतर्गत आने वाले क्लियर फ्लोट ग्लास की आयात नीति को 'मुक्त' (Free) श्रेणी से बदलकर 'प्रतिबंधित' (Restricted) कर दिया गया है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि आयातित माल का सीआईएफ (लागत, बीमा और माल ढुलाई) मूल्य 34,000 रुपये प्रति टन या उससे अधिक है, तो आयात की अनुमति बनी रहेगी। इस मूल्य सीमा से कम कीमत पर आने वाले शिपमेंट अब सीधे तौर पर प्रतिबंधित होंगे, जिससे विदेशी कंपनियों द्वारा की जाने वाली 'प्राइस डंपिंग' पर रोक लगेगी।
यह कदम भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका लक्ष्य स्थानीय विनिर्माण को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के सामने सुरक्षा प्रदान करना है। भारतीय बाजार में पिछले कुछ समय से पड़ोसी देशों और अन्य वैश्विक केंद्रों से कम कीमत वाले ग्लास की आवक बढ़ गई थी, जिससे स्थानीय इकाइयों के मुनाफे और उत्पादन क्षमता पर असर पड़ रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस न्यूनतम मूल्य निर्धारण से घरेलू बाजार में कीमतों में स्थिरता आएगी और स्थानीय कंपनियों को अपनी विस्तार योजनाओं में निवेश करने का प्रोत्साहन मिलेगा।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय और वहां के निर्माण क्षेत्र से जुड़े व्यवसायियों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंधों के बीच, भारत का अपनी विनिर्माण नीतियों को कड़ा करना वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है। ऑस्ट्रेलिया में कई भारतीय-मूल के उद्यमी बिल्डिंग मटेरियल और रियल एस्टेट सेक्टर में सक्रिय हैं; उनके लिए भारत में ग्लास की बढ़ती कीमतें और संशोधित आयात नियम व्यापारिक रणनीतियों को प्रभावित कर सकते हैं।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इस घोषणा के बाद सेंट-गोबेन इंडिया और असाही इंडिया जैसी कंपनियों के शेयरों में सकारात्मक रुख देखा जा सकता है। यह नीति न केवल डंपिंग को रोकेगी, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले मानकों को भी बढ़ावा देगी। कुल मिलाकर, यह निर्णय भारतीय विनिर्माण क्षेत्र को एक प्रतिस्पर्धी बढ़त प्रदान करने और वैश्विक व्यापार संतुलन को भारत के पक्ष में करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है।
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