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क्षेत्रीय तनाव के बावजूद बेहतर भविष्य की तलाश: मणिपुर की दो बहनें इज़राइल में बनीं मिसाल

ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 01:30 am
क्षेत्रीय तनाव के बावजूद बेहतर भविष्य की तलाश: मणिपुर की दो बहनें इज़राइल में बनीं मिसाल

मणिपुर की रीना और पूनम ने इज़राइल में केयरगिविंग क्षेत्र में बेहतर संभावनाओं के लिए सुरक्षा चुनौतियों को दरकिनार कर एक नई मिसाल पेश की है।

तेल अवीव के बेन गुरियन हवाई अड्डे पर इमिग्रेशन की कतार में खड़ी दो महिलाओं की मुलाकात महज़ एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि भारतीय प्रवासियों के संघर्ष और अडिग साहस की एक अनकही कहानी थी। मणिपुर की रहने वाली दो बहनें, रीना और पूनम, इज़राइल के जटिल हालातों के बीच अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए वहां पहुंची हैं। जहां एक ओर पश्चिम एशिया में युद्ध और तनाव की खबरें सुर्खियों में हैं, वहीं दूसरी ओर भारतीय समुदाय के ये लोग आर्थिक स्थिरता की तलाश में इन खतरों को स्वीकार कर रहे हैं। रीना, जो पिछले कुछ समय से तेल अवीव में एक केयरगिवर के रूप में कार्यरत हैं, अपनी बहन पूनम का स्वागत करने पहुंची थीं। पूनम भी अब इसी पेशे के जरिए अपने सपनों को साकार करने की उम्मीद रखती हैं। इज़राइल में केयरगिविंग (देखभाल) का क्षेत्र भारतीय श्रमिकों, विशेषकर उत्तर-पूर्वी राज्यों और केरल के लोगों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बना हुआ है। रीना के अनुसार, हालांकि वहां सुरक्षा संबंधी चिंताएं रहती हैं, लेकिन वहां मिलने वाला सम्मान और आर्थिक पारिश्रमिक भारत के स्थानीय अवसरों की तुलना में कहीं अधिक है। यह कहानी केवल इन दो बहनों की नहीं है, बल्कि उन हज़ारों भारतीयों की है जो अपनी सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि के बीच एक कठिन संतुलन बनाए रखते हैं। इज़राइल और हमास के बीच जारी संघर्ष के बावजूद, भारत सरकार और इज़राइली प्रशासन के बीच हुए द्विपक्षीय समझौतों के तहत भारतीय श्रमिकों का वहां जाना जारी है। विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर एक अलग परिप्रेक्ष्य प्रदान करती है, जहां वे खुद भी एक प्रवासी के रूप में चुनौतियों का सामना कर चुके हैं, हालांकि वहां की परिस्थितियां इज़राइल से काफी भिन्न हैं। मणिपुर में चल रही आंतरिक अस्थिरता ने भी कई युवाओं को बाहर निकलने पर मजबूर किया है। रीना और पूनम जैसी महिलाओं के लिए विदेशी धरती पर काम करना केवल पैसा कमाना नहीं, बल्कि अपने पीछे छूटे परिवार को सुरक्षा और स्थिरता प्रदान करना है। इज़राइल में भारतीय दूतावास लगातार भारतीय नागरिकों के संपर्क में रहता है और आपातकालीन स्थितियों के लिए दिशा-निर्देश जारी करता रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय प्रवासियों की यह 'लचीलापन' (resilience) उन्हें वैश्विक श्रम बाजार में एक विश्वसनीय नाम बनाती है। रीना और पूनम की यह मुलाकात इस बात का प्रमाण है कि अवसर की तलाश में भारतीय नागरिक सीमाओं और संघर्षों की परवाह किए बिना अपनी पहचान बनाने का हुनर रखते हैं।
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