राजनीति
रूस-भारत रेल परियोजना: हिंद महासागर तक ट्रेन चलाने की तैयारी, क्या व्यापार की दुनिया में आएगा बड़ा बदलाव?
ICN24 Newsroom 11 अग॰ 2026, 03:37 pm
रूस ने भारत के साथ व्यापारिक और सामरिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए हिंद महासागर तक एक विशाल रेल मार्ग का प्रस्ताव रखा है।
नई दिल्ली और मॉस्को के बीच दशकों पुरानी अटूट दोस्ती अब पटरियों पर दौड़ने के लिए तैयार है। सोवियत संघ के दौर से चली आ रही इस रणनीतिक साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाते हुए रूस ने हिंद महासागर तक पहुंचने वाले एक व्यापक रेल मार्ग का प्रस्ताव दिया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया भारत यात्रा और दोनों देशों के बीच हुए उच्च स्तरीय संवाद के बाद इस महत्वाकांक्षी परियोजना ने जोर पकड़ा है। रूसी उप-प्रधानमंत्री ने इस रेल मार्ग की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं, जो न केवल माल ढुलाई बल्कि भविष्य में यात्रियों के लिए भी एक नया विकल्प बन सकता है।
इस प्रस्तावित रेल मार्ग का मुख्य उद्देश्य यूरेशिया के विशाल भूभाग को पार करते हुए भारतीय बंदरगाहों को रूसी औद्योगिक केंद्रों से जोड़ना है। वर्तमान में, भारत और रूस के बीच व्यापार मुख्य रूप से समुद्री मार्गों पर निर्भर है, जो स्वेज नहर से होकर गुजरता है। यह नया कॉरिडोर न केवल दूरी को कम करेगा, बल्कि परिवहन लागत में भी भारी कटौती करेगा। हालांकि 'राजधानी' या 'शताब्दी' जैसी ट्रेनों के माध्यम से मॉस्को से भारत पहुंचने में कई दिन लग सकते हैं, लेकिन इस लंबी यात्रा के सामरिक और आर्थिक फायदे अनगिनत बताए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना 'इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर' (INSTC) का विस्तार हो सकती है। इसमें ईरान के माध्यम से रूस और भारत को जोड़ना शामिल है। हिंद महासागर तक सीधी रेल पहुंच मिलने से रूस को मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया के बाजारों में सीधा प्रवेश मिलेगा। भारत के लिए यह ऊर्जा सुरक्षा और मध्य एशियाई देशों तक पहुंच के लिहाज से गेम-चेंजर साबित हो सकता है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब दुनिया वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) की तलाश कर रही है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक हलचल के बीच, भारत और रूस का यह नया बुनियादी ढांचा तालमेल वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है। ऑस्ट्रेलिया, जो खुद हिंद महासागर का एक प्रमुख देश है, भारत के व्यापारिक विस्तार और सुरक्षित समुद्री मार्गों पर गहरी नजर रखता है। भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और इस तरह के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स प्रवासी भारतीयों के बीच भारत के बढ़ते कद के प्रतीक के रूप में देखे जा रहे हैं।
हालांकि, इस सफर की राह में कई चुनौतियां भी हैं। विभिन्न देशों की भौगोलिक सीमाएं, राजनीतिक स्थिरता और रेल पटरियों का अलग-अलग गेज (Gauge) होना कुछ ऐसी तकनीकी बाधाएं हैं जिन पर काम करना अभी बाकी है। लेकिन जिस तरह से रूस और भारत ने हर मुश्किल घड़ी में एक-दूसरे का साथ दिया है, उससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दशक में यह रेल मार्ग हकीकत बन सकता है।
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