राजनीति
टीएमसी मुख्यालय पर ऋतब्रत गुट का दावा; ममता बनर्जी खेमे ने पुलिस में दर्ज कराई घुसपैठ की शिकायत
ICN24 Newsroom 4 जुल॰ 2026, 01:31 pm

तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक कलह बढ़ गई है क्योंकि ऋतब्रत बनर्जी के गुट ने पार्टी मुख्यालय पर कब्जे का दावा किया है, जिसे ममता खेमे ने अवैध बताया है।
पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा सत्ता संघर्ष अब सड़कों और पार्टी मुख्यालय तक पहुँच गया है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने कोलकाता स्थित पार्टी मुख्यालय 'तृणमूल भवन' पर अपना दावा ठोकते हुए वहां से कामकाज शुरू करने की घोषणा की है। इस कदम ने पार्टी के भीतर एक बड़े संवैधानिक और कानूनी संकट को जन्म दे दिया है, जिससे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले आधिकारिक खेमे में भारी नाराजगी है।
हाल ही में भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के समक्ष पार्टी के नाम और आधिकारिक चुनाव चिह्न पर अपना हक जताने के बाद, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले समूह ने अब भौतिक संपत्तियों पर नियंत्रण पाने की कोशिश शुरू कर दी है। बागी गुट का तर्क है कि वे ही असली तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करते हैं और इसलिए पार्टी के मुख्यालय पर उनका कानूनी अधिकार है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में पार्टी की सभी महत्वपूर्ण बैठकें इसी भवन से आयोजित की जाएंगी।
इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ममता बनर्जी के वफादार और पार्टी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने इसे एक 'अवैध प्रयास' करार दिया है। घोष ने स्पष्ट किया कि ऋतब्रत बनर्जी और उनके साथ गए सदस्य पार्टी से निष्कासित किए जा चुके हैं और उनके पास पार्टी की संपत्ति या नाम का उपयोग करने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है। ममता खेमे ने कोलकाता पुलिस में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि बागी गुट ने मुख्यालय में अनाधिकृत रूप से प्रवेश करने और जबरन कब्जा करने की कोशिश की है।
तृणमूल कांग्रेस के भीतर यह विभाजन बंगाल की राजनीति में एक नए मोड़ का संकेत दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह लड़ाई केवल एक इमारत की नहीं, बल्कि पार्टी के कैडर और वोट बैंक पर नियंत्रण की है। ममता बनर्जी, जो वर्तमान में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं, के लिए यह एक बड़ी चुनौती है क्योंकि यह विद्रोह उनके सबसे करीबी माने जाने वाले हलकों से उपजा है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले प्रवासी भारतीय, विशेषकर सिडनी और मेलबर्न में रहने वाला बंगाली समुदाय, इन घटनाक्रमों को बड़े चाव से देख रहा है। पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिरता का सीधा प्रभाव वहां के निवेश और सामाजिक माहौल पर पड़ता है, जिससे प्रवासी भारतीयों के परिवार और व्यावसायिक हित जुड़े होते हैं। वर्तमान में मामला चुनाव आयोग और पुलिस के पास है, और आने वाले कुछ दिनों में यह स्पष्ट होगा कि तृणमूल कांग्रेस का असली उत्तराधिकारी कौन है।
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