राजनीति
भूमि विवादों की जड़ में राजस्व विभाग की लापरवाही, आयुक्त ने व्यवस्था सुधारने पर दिया जोर
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 03:38 am

पटना आयुक्त ने माना कि राजस्व कर्मियों की लापरवाही और गलत प्रविष्टियों के कारण भूमि विवाद बढ़ रहे हैं। उन्होंने निष्पक्ष कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की वकालत की है।
पटना। बिहार में भूमि विवाद की बढ़ती घटनाओं और इनके कारण उत्पन्न होने वाली कानून-व्यवस्था की समस्याओं पर प्रमंडलीय आयुक्त ने कड़ा रुख अपनाया है। आयुक्त ने अपने विस्तृत प्रशासनिक अनुभवों को साझा करते हुए स्पष्ट किया है कि प्रदेश में हो रहे अधिकांश भूमि विवादों की जड़ में राजस्व तंत्र की खामियां और निचले स्तर के कर्मियों की लापरवाही निहित है। उनके अनुसार, यदि राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन ईमानदारी से करें, तो आधे से अधिक विवादों को शुरू होने से पहले ही सुलझाया जा सकता है।
आयुक्त ने रेखांकित किया कि अंचल स्तर पर तैनात राजस्व कर्मियों द्वारा की जाने वाली गलत प्रविष्टियां (wrong entries) और रिकॉर्ड्स के रखरखाव में अनियमितता ही लंबे समय तक चलने वाली मुकदमेबाजी का आधार बनती है। कई मामलों में यह देखा गया है कि एक ही जमीन के अलग-अलग दावेदारों के नाम पर कागजात जारी कर दिए जाते हैं या जानबूझकर जमाबंदी में गड़बड़ी की जाती है। यह न केवल आम जनता के लिए परेशानी का सबब है, बल्कि इससे सामाजिक सौहार्द भी बिगड़ता है।
ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में रह रहे भारतीय समुदाय (NRIs) के लिए यह मुद्दा अत्यंत संवेदनशील है। प्रवासी भारतीयों की एक बड़ी आबादी अपनी पैतृक संपत्ति की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती है। अक्सर देखने में आता है कि विदेश में रहने के कारण उनकी अनुपस्थिति का फायदा उठाकर स्थानीय भू-माफिया या प्रभावशील लोग राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से कागजों में हेरफेर कर लेते हैं। आयुक्त के इस बयान ने उन प्रवासियों की चिंताओं को एक आधिकारिक मंच प्रदान किया है, जो अपनी जमीनों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
आयुक्त ने प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि राजस्व कर्मियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि दाखिल-खारिज (mutation) की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए और समय सीमा के भीतर मामलों का निस्तारण सुनिश्चित हो। यदि कोई कर्मी जानबूझकर देरी करता है या गलत रिपोर्ट लगाता है, तो उस पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि विवादों का समाधान केवल पुलिसिया कार्रवाई से संभव नहीं है। जब तक राजस्व रिकॉर्ड्स का पूर्णतः डिजिटलीकरण और उनका भौतिक सत्यापन (physical verification) सटीक नहीं होगा, तब तक विवाद बने रहेंगे। बिहार सरकार इस दिशा में कदम उठा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन अभी भी एक बड़ी चुनौती है। आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे संवेदनशील मामलों की पहचान करें और पक्षपात रहित होकर निर्णय लें, ताकि न्यायपालिका पर भी बढ़ते बोझ को कम किया जा सके।
अंततः, यह रिपोर्ट उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है जो वर्षों से भूमि विवादों की आग में झुलस रहे हैं। विशेष रूप से भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए, यह खबर भारत में प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखी जा सकती है, जिससे उनकी संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित होने की संभावना बढ़ेगी।
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