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अनिल अंबानी को बड़ी राहत: ₹420 करोड़ के ब्लैक मनी केस में बॉम्बे हाई कोर्ट ने दंडात्मक कार्रवाई पर लगाई रोक
ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 06:30 pm

बॉम्बे हाई कोर्ट ने ₹420 करोड़ की कथित टैक्स चोरी के मामले में उद्योगपति अनिल अंबानी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी को एक बड़ी राहत देते हुए आयकर विभाग द्वारा उनके खिलाफ शुरू की गई दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह मामला ₹420 करोड़ की कथित कर चोरी और काला धन (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) अधिरोपण अधिनियम, 2015 के उल्लंघन से जुड़ा है। न्यायमूर्ति बी.पी. कोलाबावाला और न्यायमूर्ति फिरदोश पूनीवाला की खंडपीठ ने अंबानी की उस याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें उन्होंने इस अधिनियम की कुछ धाराओं की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आयकर विभाग फिलहाल उनके खिलाफ कोई भी कठोर कदम नहीं उठा सकता। अंबानी ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि ब्लैक मनी एक्ट के प्रावधानों को पूर्वव्यापी प्रभाव (retrospective effect) से लागू किया जा रहा है, जो कानूनी रूप से उचित नहीं है। उनका कहना है कि जिन कथित लेन-देन का जिक्र किया जा रहा है, वे उस समय के हैं जब यह कानून अस्तित्व में भी नहीं आया था।
आयकर विभाग ने आरोप लगाया था कि अनिल अंबानी ने दो विदेशी खातों में जमा ₹814 करोड़ से अधिक की अघोषित संपत्ति पर टैक्स नहीं चुकाया है। विभाग का दावा है कि अंबानी ने जानबूझकर अपनी विदेशी संपत्ति का खुलासा नहीं किया। इसके जवाब में अंबानी के कानूनी प्रतिनिधियों ने कहा कि आयकर विभाग का नोटिस कानून की गलत व्याख्या पर आधारित है और यह उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
यह मामला भारतीय व्यापारिक जगत के साथ-साथ विदेशों में रह रहे प्रवासी भारतीयों (NRIs) के लिए भी महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में बसे भारतीय समुदाय के लोग, जो भारत में निवेश करते हैं या जिनकी दोहरी संपत्ति संरचनाएं हैं, अक्सर जटिल टैक्स कानूनों के दायरे में आते हैं। अनिल अंबानी जैसे हाई-प्रोफाइल मामले यह दर्शाते हैं कि भारत सरकार विदेशी संपत्तियों और अघोषित आय को लेकर अपनी नीतियों को कड़ा कर रही है। हालांकि, न्यायपालिका की यह हालिया टिप्पणी कर दाताओं को प्रक्रियात्मक न्याय का भरोसा दिलाती है।
अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए समय निर्धारित किया है और केंद्र सरकार व आयकर विभाग से अंबानी की चुनौती पर जवाब मांगा है। जब तक इस याचिका पर अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक विभाग अंबानी की संपत्ति कुर्क करने या उनके खिलाफ गिरफ्तारी जैसी कोई कार्रवाई नहीं कर पाएगा। यह घटनाक्रम रिलायंस समूह के लिए एक अस्थायी लेकिन महत्वपूर्ण कानूनी जीत माना जा रहा है।
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