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83 सदस्य, 6 पीढ़ियां और एक रसोई: आंध्र प्रदेश के इस संयुक्त परिवार ने पेश की एकता की अनूठी मिसाल

ICN24 Newsroom 13 जुल॰ 2026, 12:31 pm
83 सदस्य, 6 पीढ़ियां और एक रसोई: आंध्र प्रदेश के इस संयुक्त परिवार ने पेश की एकता की अनूठी मिसाल

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में 83 सदस्यों का एक विशाल परिवार आज भी एक ही छत के नीचे और एक ही रसोई से जुड़ा हुआ है, जो आधुनिक दौर में संयुक्त परिवार की मिसाल है।

आधुनिकता की दौड़ और पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव में आज 'न्यूक्लियर फैमिली' यानी एकल परिवार का चलन तेजी से बढ़ा है। ऑस्ट्रेलिया से लेकर भारत के बड़े शहरों तक, लोग निजता और छोटे परिवारों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे दौर में आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले से आई एक कहानी न केवल चौंकाती है, बल्कि पारंपरिक भारतीय पारिवारिक मूल्यों की याद भी दिलाती है। यहाँ एक ही छत के नीचे 83 सदस्य रहते हैं, जो पिछले छह पीढ़ियों से एक अटूट बंधन में बंधे हुए हैं। इस परिवार की सबसे बड़ी विशेषता इनका 'साझा चूल्हा' है। जहाँ आज दो भाइयों का एक साथ रहना मुश्किल माना जाता है, वहीं इस परिवार में 83 लोगों का खाना एक ही रसोई में बनता है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि वे न केवल भोजन साझा करते हैं, बल्कि अपनी खुशियाँ, दुख और कमाई भी एक ही जगह जमा करते हैं। यह व्यवस्था किसी संगठित संस्थान की तरह काम करती है, जहाँ अनुशासन और प्रेम का अनूठा तालमेल देखने को मिलता है। परिवार के ढांचे की बात करें तो इसमें सबसे बुजुर्ग सदस्य से लेकर नवजात शिशुओं तक, छह पीढ़ियों का संगम है। खेती-किसानी और अन्य व्यवसायों से होने वाली पूरी आय एक केंद्रीय कोष में जमा होती है, जिससे पूरे घर की जरूरतों को पूरा किया जाता है। घर का कोई भी बड़ा फैसला व्यक्तिगत नहीं होता; बल्कि सभी वयस्क सदस्य साथ बैठकर चर्चा करते हैं और सर्वसम्मति से निर्णय लेते हैं। इस प्रक्रिया ने परिवार में विवादों की गुंजाइश को लगभग खत्म कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह कहानी एक विशेष महत्व रखती है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रह रहे प्रवासी भारतीय अक्सर अपनी जड़ों और उस सामूहिक सुरक्षा की कमी महसूस करते हैं जो कभी संयुक्त परिवारों का हिस्सा हुआ करती थी। इस परिवार की कहानी दर्शाती है कि यदि आपसी समझ और त्याग की भावना हो, तो बड़े परिवारों में मिलने वाला भावनात्मक और सामाजिक सहयोग किसी भी आधुनिक सुविधा से कहीं बढ़कर है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संयुक्त परिवार बुजुर्गों के लिए एक बेहतरीन 'सपोर्ट सिस्टम' का काम करते हैं। इस परिवार में वृद्धों को अकेलापन महसूस नहीं होता और बच्चों को अपने संस्कारों और इतिहास की सीख सीधे अपने परदादा-परदादी से मिलती है। अनंतपुर का यह परिवार आज सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है, और लोग इसे 'सच्चा भारत' कह रहे हैं। एकता की यह मिसाल साबित करती है कि प्रेम और सामंजस्य के साथ बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना सामूहिक रूप से किया जा सकता है।
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