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राहु का रत्न 'गोमेद': इन लोगों को भूलकर भी नहीं पहनना चाहिए यह पत्थर, शनि और गुरु के रत्नों के साथ भी बरतें सावधानी
ICN24 Newsroom 20 अग॰ 2026, 01:37 pm

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु का रत्न गोमेद हर किसी के लिए फलदायी नहीं होता। गलत चयन से मानसिक और आर्थिक नुकसान हो सकता है।
वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की दशा और दिशा सुधारने के लिए रत्नों का विशेष महत्व बताया गया है। इनमें राहु का रत्न 'गोमेद' (Hessonite) अपनी तीव्र ऊर्जा के लिए जाना जाता है। हालांकि, ज्योतिषियों का मानना है कि गोमेद धारण करना हर व्यक्ति के लिए शुभ नहीं होता। यदि इसे बिना परामर्श या गलत नक्षत्र में पहना जाए, तो यह फायदे की जगह भारी नुकसान पहुंचा सकता है। विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के बीच भी ज्योतिषीय परामर्श की लोकप्रियता बढ़ी है, जहाँ लोग अपने करियर और व्यक्तिगत जीवन में संतुलन के लिए रत्नों का सहारा लेते हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहु एक छाया ग्रह है जो अचानक होने वाली घटनाओं का कारक है। गोमेद रत्न उन लोगों के लिए वर्जित माना गया है जिनकी कुंडली में सूर्य, चंद्रमा या मंगल प्रबल स्थिति में हों। यदि आपकी राशि मेष, सिंह, वृश्चिक या धनु है, तो गोमेद पहनने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लेना अनिवार्य है। इन राशियों के स्वामी ग्रहों का राहु के साथ शत्रुतापूर्ण संबंध होता है, जिससे मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
एक महत्वपूर्ण चेतावनी यह भी है कि गोमेद को कभी भी गुरु (पुखराज) या शनि (नीलम) के रत्नों के साथ बिना सोचे-समझे नहीं पहनना चाहिए। गुरु और राहु का संयोग 'चांडाल योग' जैसी स्थितियां निर्मित कर सकता है, जबकि शनि और राहु का मेल 'विषाक्त योग' का कारण बन सकता है। इससे व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है और पारिवारिक कलह बढ़ने की आशंका रहती है।
ऑस्ट्रेलियाई शहरों जैसे सिडनी, मेलबर्न और पर्थ में रहने वाले प्रवासियों के लिए यह जानना जरूरी है कि ऑनलाइन विज्ञापनों के झांसे में आकर रत्न न खरीदें। गोमेद पहनने से पहले उसकी शुद्धता और वजन (रत्ती) का सही आकलन कुंडली के अनुसार होना चाहिए। यदि राहु कुंडली के केंद्र (1, 4, 7, 10वें भाव) में शुभ स्थिति में हो, तभी यह राजनीति, कानून और कूटनीति के क्षेत्र में सफलता दिलाता है। अन्यथा, यह अचानक होने वाली दुर्घटनाओं और अदालती मामलों में फंसा सकता है।
निष्कर्ष के तौर पर, रत्न केवल आभूषण नहीं बल्कि ऊर्जा के स्रोत हैं। गोमेद धारण करने से पहले शनिवार के दिन इसकी विधि-विधान से पूजा और राहु के मंत्रों का जाप आवश्यक है। यदि इसे पहनने के बाद आपको डरावने सपने आएं या बेचैनी महसूस हो, तो इसे तुरंत उतार देना ही श्रेयस्कर है।
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