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सऊदी अरब के NEOM नेचर रिजर्व में नन्हे मेहमान का आगमन: दुर्लभ धारीदार लकड़बग्घे के जन्म से रचा इतिहास
ICN24 Newsroom 20 अग॰ 2026, 06:37 am

सऊदी अरब के NEOM रिजर्व में पहली बार धारीदार लकड़बग्घे के बच्चे का जन्म हुआ है, जो वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
सऊदी अरब की भविष्योन्मुखी मेगा-सिटी परियोजना, NEOM, ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। NEOM नेचर रिजर्व और नेशनल सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ (NCW) के बीच एक संयुक्त सहयोग के तहत, रिजर्व की सीमाओं के भीतर पहली बार एक धारीदार लकड़बग्घे (Striped Hyena) के बच्चे का जन्म हुआ है। यह घटना न केवल इस क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण के वैश्विक प्रयासों को भी नई ऊर्जा प्रदान करती है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस नन्हे शावक का जन्म प्राकृतिक आवास के भीतर हुआ है, जो यह दर्शाता है कि रिजर्व का वातावरण इन जंगली जानवरों के फलने-फूलने के लिए अनुकूल हो गया है। वन्यजीव विशेषज्ञों ने इस घटना को एक 'बड़ी जीत' करार दिया है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में मादा लकड़बग्घे को अपने नन्हे शावक के साथ मांद से बाहर निकलते हुए देखा जा सकता है। यह दृश्य पर्यावरण प्रेमियों और वैज्ञानिकों के लिए उत्साहजनक है, क्योंकि धारीदार लकड़बग्घे अपनी शर्मीली प्रकृति और घटती आबादी के कारण कम ही दिखाई देते हैं।
धारीदार लकड़बग्घा (Hyaena hyaena) का भारतीय संदर्भ में भी गहरा महत्व है। भारत में, विशेष रूप से राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के शुष्क क्षेत्रों में, यह प्रजाति पाई जाती है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय, जो अक्सर भारत के समृद्ध वन्यजीवों और ऑस्ट्रेलिया की जैव विविधता संरक्षण नीतियों से जुड़े रहते हैं, के लिए यह खबर वैश्विक पारिस्थितिक संतुलन की दृष्टि से प्रासंगिक है। जिस तरह भारत में चीतों के पुनर्वास और ऑस्ट्रेलिया में संकटग्रस्त मार्सुपियल्स (marsupials) को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं, सऊदी अरब का यह कदम भी उसी कड़ी का हिस्सा है।
NEOM नेचर रिजर्व और नेशनल सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ के बीच यह साझेदारी 'सऊदी ग्रीन इनिशिएटिव' (SGI) के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए की गई है। इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य स्थानीय वन्यजीवों का संरक्षण करना, उनकी आबादी को पुनर्जीवित करना और उन्हें उनके प्राकृतिक आवासों में वापस छोड़ना है। धारीदार लकड़बग्घा पारिस्थितिकी तंत्र में एक 'सफाईकर्मी' (scavenger) के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे प्रकृति में बीमारियों के प्रसार को रोकने में मदद मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि NEOM में इस तरह के सफल जन्म इस बात का प्रमाण हैं कि कृत्रिम रूप से प्रबंधित रिजर्व भी वन्यजीवों को सुरक्षित वातावरण प्रदान कर सकते हैं। आने वाले वर्षों में, अधिकारी और अधिक प्रजातियों के पुनर्वास की योजना बना रहे हैं। यह सफलता वैश्विक स्तर पर काम कर रहे भारतीय वन्यजीव विशेषज्ञों और संरक्षणवादियों के लिए भी अध्ययन का एक नया विषय है, जो शुष्क क्षेत्रों में मांसाहारी जानवरों के प्रबंधन पर शोध कर रहे हैं।
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