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उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर: प्रयागराज और नारायणबगड़ में स्कूलों की छुट्टी घोषित
ICN24 Newsroom 20 अग॰ 2026, 01:37 pm
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रयागराज और उत्तराखंड के नारायणबगड़ में स्कूलों को बंद करने के आदेश जारी किए गए हैं।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई जिलों में मानसून की भारी बारिश ने सामान्य जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया है। विशेष रूप से प्रयागराज और चमोली जिले के नारायणबगड़ क्षेत्र में स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में पिछले 24 घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश ने शहर के कई निचले इलाकों को जलमग्न कर दिया है। गलियों और मुख्य सड़कों पर पानी भरने के कारण छात्रों को स्कूल पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। अभिभावकों और छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन ने 20 अगस्त को स्कूलों में अवकाश घोषित किया है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी (ऑरेंज अलर्ट) जारी की है, जिससे स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।
वहीं, पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश और भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है। चमोली जिले के नारायणबगड़ क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के चलते प्रशासन ने एहतियात के तौर पर स्कूलों में तीन दिनों की छुट्टी की घोषणा की है। पहाड़ी क्षेत्रों में मलबे के आने और सड़कों के टूटने की खबरों के बीच बच्चों को घरों में रहने की सलाह दी गई है। स्थानीय आपदा प्रबंधन विभाग ने नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को भी सुरक्षित स्थानों पर जाने का निर्देश दिया है।
प्रयागराज के गंगा और यमुना तट पर भी जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है। प्रशासन का कहना है कि यदि बारिश इसी तरह जारी रही तो बाढ़ राहत शिविरों को सक्रिय किया जा सकता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड मूल के प्रवासी, अपने परिवारों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। आईसीएम24 (ICN24) से बात करते हुए सिडनी में रहने वाले एक निवासी ने बताया कि वे अपने पैतृक गांव में भारी बारिश की खबरों पर लगातार नजर रख रहे हैं।
प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें। बिजली के तारों और जर्जर भवनों के पास जाने से बचने की सलाह दी गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून की सक्रियता के कारण अगले 48 से 72 घंटों तक इन क्षेत्रों में राहत मिलने की संभावना कम है। सरकारी हेल्पलाइन नंबरों को भी सक्रिय कर दिया गया है ताकि आपातकालीन स्थिति में नागरिकों को तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।
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