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पंजाब: भगवंत मान सरकार का 'नशे के विरुद्ध युद्ध' अभियान 3,440 गांवों तक पहुंचा, ई-रिक्शा के जरिए जन-जागरण
ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 04:30 am

पंजाब सरकार का 'नशे के विरुद्ध युद्ध' अभियान अब राज्य के जमीनी स्तर तक पहुंच गया है। ई-रिक्शा के जरिए 3,440 गांवों में नशा विरोधी जागरूकता फैलाई जा रही है।
पंजाब की भगवंत मान सरकार ने राज्य से नशे की समस्या को जड़ से मिटाने के लिए अपने प्रमुख अभियान 'नशे के विरुद्ध युद्ध' (Yudh Nashean Virudh) को एक नई गति दी है। इस मुहिम के तहत विशेष रूप से तैयार किए गए ई-रिक्शा अब राज्य के सुदूर ग्रामीण इलाकों तक पहुंच रहे हैं। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, यह अभियान अब तक पंजाब के 3,440 गांवों को कवर कर चुका है, जो सामुदायिक स्तर पर नशा विरोधी संदेश पहुंचाने में एक बड़ी उपलब्धि है।
यह पहल एक पायलट प्रोजेक्ट का हिस्सा है जिसे वर्तमान में राज्य के 86 विधानसभा क्षेत्रों में चलाया जा रहा है। इन ई-रिक्शा का मुख्य उद्देश्य केवल सूचना का प्रसार करना नहीं है, बल्कि स्थानीय समुदायों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और उन्हें इस लड़ाई में सक्रिय भागीदार बनाना है। इन वाहनों के माध्यम से गांव-गांव में ऑडियो-विजुअल संदेश और पंपलेट वितरित किए जा रहे हैं, जो युवाओं को नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि पंजाब की जवानी को बचाने के लिए केवल प्रवर्तन (enforcement) काफी नहीं है, बल्कि एक व्यापक जन-आंदोलन की आवश्यकता है। ई-रिक्शा अभियान इसी रणनीति का हिस्सा है, जिससे सरकारी संदेश सीधे उन घरों तक पहुंच रहा है जहां इंटरनेट या मुख्यधारा की मीडिया की पहुंच सीमित हो सकती है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेषकर पंजाबी प्रवासियों के लिए यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रवासी समुदाय लंबे समय से पंजाब में बढ़ते नशे के संकट को लेकर चिंतित रहा है। मेलबर्न, सिडनी और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले कई पंजाबी परिवार अक्सर अपने पैतृक गांवों में युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त करते रहे हैं। इस तरह के जमीनी स्तर के प्रयास प्रवासियों के बीच एक सकारात्मक उम्मीद जगाते हैं कि राज्य सरकार इस गंभीर सामाजिक मुद्दे के समाधान के लिए पारंपरिक तरीकों से हटकर नवाचार कर रही है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान की सफलता को देखते हुए इसे आने वाले महीनों में राज्य के अन्य हिस्सों में भी विस्तारित करने की योजना है। 'नशे के विरुद्ध युद्ध' का उद्देश्य न केवल तस्करी रोकना है, बल्कि पुनर्वास और नशामुक्ति के प्रति जागरूकता पैदा करना भी है। ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत किया है, क्योंकि ई-रिक्शा संकरी गलियों और दूरदराज के रिहायशी इलाकों तक आसानी से पहुंच जाते हैं, जिससे यह अभियान वास्तव में एक 'जमीनी आंदोलन' बन गया है।
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