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प्रयागराज वार्ड 11: नगर निगम ने वसूला टैक्स पर नहीं दी सुविधाएं; गंदगी और कीचड़ के बीच रहने को मजबूर लोग

ICN24 Newsroom 10 जुल॰ 2026, 12:31 pm
प्रयागराज वार्ड 11: नगर निगम ने वसूला टैक्स पर नहीं दी सुविधाएं; गंदगी और कीचड़ के बीच रहने को मजबूर लोग

प्रयागराज के वार्ड 11 अमरसापुर के निवासियों ने नगर निगम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 2018 में निगम में शामिल होने के बावजूद क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के वार्ड संख्या 11 (अमरसापुर) में स्थानीय निवासियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। नगर निगम प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हुए वार्डवासियों का कहना है कि प्रशासन ने उनसे हाउस टैक्स तो नियमित रूप से वसूला, लेकिन बदले में उन्हें केवल बदबू, कीचड़ और अंधेरा ही मिला है। दैनिक भास्कर की 'वार्ड परिक्रमा' के दौरान यह तथ्य सामने आया कि विकास के बड़े-बड़े दावों और जमीनी हकीकत के बीच एक गहरी खाई मौजूद है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में अमरसापुर और आसपास के इलाकों को नगर निगम की सीमा में शामिल किया गया था। उस समय निवासियों को उम्मीद थी कि अब उन्हें ग्रामीण परिवेश से मुक्ति मिलेगी और शहरी सुविधाएं प्राप्त होंगी। हालांकि, पांच साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी रहीमापुर और अमरसापुर जैसे इलाकों में न तो पक्की सड़कें बनी हैं और न ही जल निकासी के लिए उचित नालियां। बारिश के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब ये कच्चे रास्ते दलदल में तब्दील हो जाते हैं और स्थानीय लोगों का अपने घरों से निकलना दूभर हो जाता है। वार्ड की मुख्य समस्याओं में चोक पड़ी नालियां और जलभराव सबसे ऊपर हैं। क्षेत्र का मुख्य नाला और अधिकांश छोटी नालियां सिल्ट (गाद) और कचरे से पटी हुई हैं। सफाई व्यवस्था का आलम यह है कि खाली पड़े प्लॉट अब कूड़ाघर बन चुके हैं, जिससे बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय निवासी नियाज़ अहमद ने बताया कि जल निकासी की कोई व्यवस्था न होने से सड़कों पर गंदा पानी भरा रहता है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों को आवागमन में भारी परेशानी होती है। बिजली और सुरक्षा की स्थिति भी उतनी ही चिंताजनक है। रहीमापुर के मुख्य मार्ग पर बिजली का ट्रांसफार्मर जमीन पर असुरक्षित तरीके से रखा हुआ है, जो कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। इसके अलावा, कई मोहल्लों में न तो बिजली के खंभे हैं और न ही स्ट्रीट लाइटें। रात होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है, जिससे सुरक्षा का संकट भी खड़ा हो जाता है। रज़ीना बानो और बेबी बेगम जैसे स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद जनप्रतिनिधि और अधिकारी केवल कोरे आश्वासन देकर चले जाते हैं। सिर्फ बुनियादी ढांचा ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी यहां के लोगों को सता रही हैं। वार्ड में संचालित ईंट-भट्ठों से निकलने वाले धुएं और धूल के कारण वायु प्रदूषण चरम पर है। नियमित फॉगिंग और कीटनाशकों के छिड़काव के अभाव में मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लोग अक्सर अपने पैतृक स्थानों की ऐसी स्थितियों को लेकर चिंता व्यक्त करते हैं, क्योंकि वे वहां की सुव्यवस्थित नगर पालिकाओं और जवाबदेह प्रशासन के आदी हो चुके हैं। प्रयागराज का यह मामला भारतीय नगर निकायों में जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी को एक बार फिर उजागर करता है।
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