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संसद में गतिरोध: अमित शाह का विपक्ष को प्रस्ताव, 'आज 3 बजे से कल 3 बजे तक चर्चा के लिए तैयार'

ICN24 Newsroom 12 अग॰ 2026, 06:37 pm
संसद में गतिरोध: अमित शाह का विपक्ष को प्रस्ताव, 'आज 3 बजे से कल 3 बजे तक चर्चा के लिए तैयार'

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए विपक्ष को 24 घंटे की निरंतर चर्चा का प्रस्ताव दिया है।

नई दिल्ली। भारतीय संसद के मानसून सत्र में जारी भारी हंगामे और विधायी कार्यों में आ रही बाधाओं के बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के सामने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। शाह ने कहा है कि यदि विपक्ष गंभीर है और चर्चा चाहता है, तो सरकार आज दोपहर 3 बजे से लेकर कल दोपहर 3 बजे तक निरंतर चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए सदन की कार्यवाही को बाधित कर रहा है। सदन में बोलते हुए गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में संवाद ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने कहा, "मैं विपक्ष के नेताओं से अपील करता हूँ कि वे चर्चा से न भागें। हमारे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। यदि आप आज 3 बजे से चर्चा शुरू करने के लिए सहमत होते हैं, तो हम कल दोपहर 3 बजे तक हर सवाल का जवाब देने के लिए सदन में मौजूद रहेंगे।" शाह का यह रुख दर्शाता है कि सरकार अब विपक्ष के 'चर्चा से भागने' के आरोपों को सीधे तौर पर चुनौती दे रही है। संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—में पिछले कई दिनों से कामकाज ठप है। विपक्ष लगातार मणिपुर हिंसा, महंगाई और केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग जैसे मुद्दों पर स्थगन प्रस्ताव की मांग कर रहा है। वहीं, सरकार का तर्क है कि वह चर्चा के लिए हमेशा तैयार रही है, लेकिन विपक्ष केवल नारेबाजी और शोर-शराबे में विश्वास रखता है। अमित शाह के इस ताजा प्रस्ताव ने अब गेंद विपक्ष के पाले में डाल दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सरकार की एक रणनीतिक चाल है ताकि जनता के बीच यह संदेश जाए कि बाधा विपक्ष की ओर से है, सरकार की ओर से नहीं। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भारत की संसद में होने वाली यह हलचल अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रवासी भारतीय न केवल भारत की आंतरिक स्थिरता पर नजर रखते हैं, बल्कि संसद की कार्यप्रणाली को भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता के पैमाने के रूप में भी देखते हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में सक्रिय भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि संसद में सार्थक चर्चा न होना देश के विकास की गति को धीमा करता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को प्रभावित करता है। भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार समझौतों और द्विपक्षीय संबंधों के सुचारू क्रियान्वयन के लिए भारत में विधायी कार्यों का सुचारू रूप से चलना अनिवार्य है। फिलहाल, विपक्ष ने गृह मंत्री के इस 24 घंटे के चर्चा वाले प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यदि दोनों पक्ष इस पर सहमत होते हैं, तो यह भारतीय संसदीय इतिहास में चर्चा का एक दुर्लभ उदाहरण होगा। हालांकि, इसकी संभावना कम ही दिखती है क्योंकि विपक्षी दल प्रधानमंत्री के बयान और एक विशिष्ट नियम के तहत चर्चा की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। संसद का यह सत्र अब अपने निर्णायक मोड़ पर है, जहाँ यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या संवाद का कोई रास्ता निकलता है या गतिरोध इसी तरह जारी रहता है।
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