राजनीति
'PDA में P का मतलब पंडित भी है': अखिलेश यादव का 2027 के लिए बड़ा ब्राह्मण कार्ड
ICN24 Newsroom 6 अग॰ 2026, 10:38 pm

2027 के यूपी विधानसभा चुनावों से पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने PDA फॉर्मूले का विस्तार करते हुए ब्राह्मणों को जोड़ने का नया रणनीतिक दांव चला है।
लखनऊ — उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट अभी से सुनाई देने लगी है। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने बहुचर्चित 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को नया विस्तार देते हुए एक बड़ा राजनीतिक दांव चला है। लखनऊ में आयोजित 'प्रबुद्ध सम्मेलन' के दौरान अखिलेश ने घोषणा की कि PDA में 'P' का अर्थ अब 'पंडित' भी है।
सपा प्रमुख का यह बयान राज्य की राजनीति में एक रणनीतिक बदलाव का संकेत है। परंपरागत रूप से पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की राजनीति करने वाली समाजवादी पार्टी अब ब्राह्मण समुदाय को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे उत्तर भारतीय प्रवासियों के लिए यूपी की यह बदलती राजनीतिक बिसात काफी मायने रखती है, क्योंकि यह राज्य भारत की राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करता है और वहां होने वाले सामाजिक बदलावों का असर वैश्विक भारतीय समुदाय पर भी पड़ता है।
अखिलेश यादव ने यह कदम 2024 के लोकसभा चुनावों में मिली भारी सफलता के बाद उठाया है, जहां सपा ने 37 सीटें जीतकर उत्तर प्रदेश में सबसे बड़े विपक्षी दल के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की। अयोध्या (फैजाबाद) सीट पर दलित नेता अवधेश प्रसाद की जीत ने यह साबित कर दिया था कि PDA का समीकरण पारंपरिक वोट बैंक से आगे बढ़कर असर दिखा रहा है। अब ब्राह्मणों को इस गठबंधन का हिस्सा बताकर अखिलेश भाजपा के कोर वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी में हैं।
पार्टी मुख्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में अखिलेश ने भाजपा पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में ब्राह्मणों का अपमान हुआ है और उनके साथ अन्याय किया गया है। विकास दुबे एनकाउंटर और धार्मिक गुरुओं के साथ कथित दुर्व्यवहार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "जो लोग चुनावों में हार के बाद PDA की नई व्याख्या खोजते हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि 'P' का मतलब पंडित भी है और 'PD' का अर्थ भी पंडित ही है।"
इतना ही नहीं, अखिलेश ने राम मंदिर के चंदे में कथित धांधली को लेकर भी भाजपा को घेरा। उन्होंने इसे "सबसे बड़ा पाप" बताते हुए सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बार-बार अयोध्या दौरों के बावजूद इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हो गई? इस सम्मेलन में 'गंगा मैया की जय' और 'भगवान परशुराम की जय' के नारों के बीच अखिलेश ने यह स्पष्ट कर दिया कि 2027 की लड़ाई में वे केवल जातिगत ही नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक समन्वय के साथ उतरने वाले हैं।
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