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भारत की सबसे बड़ी नहर: मरुगंगा से इंदिरा गांधी नहर तक, जिसने बदल दी राजस्थान की किस्मत

ICN24 Newsroom 6 अग॰ 2026, 10:37 pm
भारत की सबसे बड़ी नहर: मरुगंगा से इंदिरा गांधी नहर तक, जिसने बदल दी राजस्थान की किस्मत

राजस्थान की जीवनरेखा मानी जाने वाली इंदिरा गांधी नहर ने कैसे थार के मरुस्थल को हरा-भरा बना दिया? जानिए इस विशाल सिंचाई परियोजना का इतिहास और इसका सामाजिक-आर्थिक प्रभाव।

राजस्थान के विशाल थार मरुस्थल को 'मरुस्थल' से 'नखलिस्तान' में बदलने वाली इंदिरा गांधी नहर (IGNP) केवल एक जल परियोजना नहीं, बल्कि आधुनिक भारत का एक इंजीनियरिंग चमत्कार है। इसे राजस्थान की 'जीवनरेखा' या 'मरुगंगा' के नाम से भी जाना जाता है। भारत की सबसे बड़ी इस नहर प्रणाली ने न केवल मरुस्थल की प्यास बुझाई, बल्कि उत्तर-पश्चिम राजस्थान के सात जिलों की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया। इस नहर की परिकल्पना का श्रेय बीकानेर रियासत के मशहूर इंजीनियर कंवर सैन को जाता है। उन्होंने 1940 के दशक में 'बीकानेर राज्य को पानी की आवश्यकता' विषय पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। उनका विचार था कि पंजाब की नदियों के अतिरिक्त जल को नहरों के माध्यम से राजस्थान के सूखे इलाकों तक लाया जा सकता है। आजादी के बाद, 1950 के दशक में इस परियोजना पर काम शुरू हुआ। 31 मार्च, 1958 को तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री गोविंद वल्लभ पंत ने इस परियोजना की आधारशिला रखी। शुरुआत में इस परियोजना को 'राजस्थान नहर' के नाम से जाना जाता था। हालांकि, 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद, उन्हीं के सम्मान में इस नहर का नाम बदलकर 'इंदिरा गांधी नहर' कर दिया गया। यह नहर पंजाब में सतलुज और ब्यास नदियों के संगम पर स्थित 'हरिके बैराज' से निकलती है। वहां से यह राजस्थान के हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर जैसे सुदूर जिलों तक पहुँचती है। इस नहर के निर्माण से पहले राजस्थान के इन इलाकों में जीवन अत्यंत कठिन था। पीने के पानी के लिए मीलों पैदल चलना पड़ता था और खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर थी। नहर के आने के बाद यहाँ की रेतीली जमीन पर सरसों, कपास, गेहूं और मूंगफली की बंपर पैदावार होने लगी। आज गंगानगर और हनुमानगढ़ जिले कृषि उत्पादन में भारत के अग्रणी जिलों में गिने जाते हैं। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे प्रवासी भारतीयों, विशेषकर वे जो कृषि पृष्ठभूमि से हैं, के लिए यह परियोजना एक प्रेरणादायक उदाहरण है। जिस तरह ऑस्ट्रेलिया के मुर्रे-डार्लिंग बेसिन (Murray-Darling Basin) में जल प्रबंधन की चुनौतियां हैं, ठीक उसी तरह भारत ने विपरीत परिस्थितियों में इस विशाल जल तंत्र का निर्माण किया। इंदिरा गांधी नहर ने न केवल पारिस्थितिकी को बदला, बल्कि अकाल की विभीषिका को भी काफी हद तक कम कर दिया है। आज यह नहर न केवल सिंचाई, बल्कि करोड़ों लोगों के लिए पेयजल का एकमात्र स्रोत है।
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