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बेंगलुरु में घर चाहिए तो दिखानी होगी 10वीं की मार्कशीट और ब्लड ग्रुप: मकान मालिकों की अजीबोगरीब शर्तों ने सबको चौंकाया
ICN24 Newsroom 6 अग॰ 2026, 05:37 pm
बेंगलुरु के रेंटल मार्केट में मकान मालिकों की अनोखी मांगें चर्चा का विषय बनी हुई हैं, जहां किराएदारों से अब उनकी मार्कशीट और ब्लड ग्रुप तक मांगा जा रहा है।
भारत की सिलिकॉन वैली कहे जाने वाले बेंगलुरु में मकान किराए पर लेना अब किसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी पाने से भी ज्यादा कठिन होता जा रहा है। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर एक संभावित किराएदार द्वारा साझा किए गए अनुभव ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है। इस पोस्ट के अनुसार, बेंगलुरु के एक मकान मालिक ने किराए पर फ्लैट देने के लिए व्यक्ति की 10वीं कक्षा की मार्कशीट, ब्लड ग्रुप और यहां तक कि उनके लिंक्डइन प्रोफाइल की मांग की है। यह घटना दर्शाती है कि शहर के रेंटल मार्केट में मांग और आपूर्ति का संतुलन किस हद तक बिगड़ चुका है।
रेडिट पर साझा किए गए विवरण के अनुसार, किराएदार को मकान मालिक द्वारा भेजे गए एक 'स्क्रीनिंग फॉर्म' को भरने के लिए कहा गया था। इस फॉर्म में केवल वित्तीय स्थिरता या पिछले घर के संदर्भ (references) नहीं पूछे गए थे, बल्कि शिक्षा के पुराने रिकॉर्ड और व्यक्तिगत स्वास्थ्य विवरण जैसी निजी जानकारियां भी मांगी गई थीं। सोशल मीडिया पर इस पोस्ट के वायरल होने के बाद, कई अन्य यूजर्स ने भी अपने इसी तरह के कड़वे अनुभव साझा किए, जहां उनसे 'मल्टी-राउंड इंटरव्यू' और 500 शब्दों का 'इंट्रोडक्शन लेटर' तक लिखने को कहा गया था।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह स्थिति काफी हैरान करने वाली हो सकती है। हालांकि मेलबर्न, सिडनी और ब्रिस्बेन जैसे ऑस्ट्रेलियाई शहर भी वर्तमान में गंभीर 'रेंटल क्राइसिस' (किराये के घरों की कमी) से जूझ रहे हैं, लेकिन वहां मकान मालिकों द्वारा व्यक्तिगत मार्कशीट या ब्लड ग्रुप मांगना पूरी तरह से असामान्य और संभवतः निजता कानूनों का उल्लंघन माना जाता है। ऑस्ट्रेलिया में आम तौर पर केवल आय का प्रमाण, रेंटल हिस्ट्री और पहचान पत्र की ही आवश्यकता होती है। इसके विपरीत, बेंगलुरु के मकान मालिक अब किराएदारों की 'सोशल प्रोफाइल' और 'बौद्धिक स्तर' की जांच करने का दावा कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना महामारी के बाद दफ्तरों के दोबारा खुलने और आईटी सेक्टर में आई तेजी के कारण बेंगलुरु में घरों की भारी कमी हो गई है। इसका फायदा उठाकर मकान मालिक अब न केवल मनमाना किराया वसूल रहे हैं, बल्कि किराएदारों के चयन के लिए भी ऐसी प्रक्रिया अपना रहे हैं जो काफी अपमानजनक और अनावश्यक लगती है। एचएसआर लेआउट और कोरमंगला जैसे पॉश इलाकों में तो स्थिति यह है कि एक खाली फ्लैट के लिए घंटों लंबी कतारें देखी जा रही हैं और किराएदार अपनी बोली लगाकर घर पाने की कोशिश कर रहे हैं।
यह मामला भारत में रेंटल रेगुलेशन और किराएदारों के अधिकारों पर भी सवाल खड़े करता है। जबकि सरकार 'मॉडल टेनेंसी एक्ट' के जरिए सुधारों की बात करती है, धरातल पर मकान मालिकों की मनमानी जारी है। सोशल मीडिया पर चर्चा के दौरान कई लोगों ने सुझाव दिया कि इस तरह के 'स्क्रीनिंग' पर लगाम लगनी चाहिए ताकि घर खोजने की प्रक्रिया पेशेवर और सम्मानजनक बनी रहे। बेंगलुरु की यह स्थिति फिलहाल प्रवासी भारतीयों के बीच भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है, जो अक्सर भारत में निवेश या वापसी के लिए वहां घर की तलाश करते हैं।
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