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वन नेशन का प्रधानमंत्री अल्बनीज के खिलाफ नया अभियान: फंड जुटाने की जंग तेज

ICN24 Admin 10 जून 2026, 01:18 pm
वन नेशन का प्रधानमंत्री अल्बनीज के खिलाफ नया अभियान: फंड जुटाने की जंग तेज

ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में चंदा जुटाने की होड़ तेज हो गई है, जहां पोलिन हैनसन की वन नेशन पार्टी ने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज को सीधे निशाने पर लिया है।

ऑस्ट्रेलिया के राजनीतिक परिदृश्य में फंड जुटाने की जंग एक नए स्तर पर पहुंच गई है। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की लेबर पार्टी और पोलिन हैनसन के नेतृत्व वाली 'वन नेशन' पार्टी के बीच सीधा टकराव देखने को मिल रहा है। दोनों दलों ने एक-दूसरे पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए दान अभियान (Donation Drive) शुरू किए हैं। इस ताजा विवाद की शुरुआत तब हुई जब लेबर पार्टी ने एक ऑनलाइन विज्ञापन जारी किया। इस विज्ञापन में पार्टी ने अपने समर्थकों से वित्तीय योगदान की अपील करते हुए चेतावनी दी कि 'वन नेशन' का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। लेबर ने तर्क दिया कि दक्षिणपंथी विचारधारा के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए संसाधनों की आवश्यकता है और मतदाताओं से इस 'उदय' को पीछे धकेलने में मदद मांगी। लेबर के इस कदम के ठीक एक दिन बाद, वन नेशन ने आक्रामक पलटवार किया। पार्टी ने प्रधानमंत्री अल्बनीज को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाते हुए 'स्टॉप लेबर' और 'फायर द लायर' (झूठे को बाहर करो) जैसे नारों के साथ अपना चंदा अभियान शुरू कर दिया। वन नेशन ने अपने विज्ञापनों में दावा किया कि लेबर पार्टी की नीतियां देश को नुकसान पहुंचा रही हैं और ऑस्ट्रेलियाई नागरिक प्रमुख राजनीतिक दलों के अलावा एक वास्तविक विकल्प के हकदार हैं। दिलचस्प बात यह है कि वन नेशन ने लेबर के फंड जुटाने के तरीके पर भी तंज कसा। लेबर ने जहां समर्थकों से 27 डॉलर दान करने की अपील की थी, वहीं वन नेशन ने अपने अभियान की शुरुआत 29 डॉलर से की। पार्टी ने इस तुलना का उपयोग यह बताने के लिए किया कि लेबर पार्टी राजनीतिक विरोधियों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। विज्ञापन में कहा गया, "अल्बो को लगता है कि 27 डॉलर उन्हें हमें चुप कराने का अधिकार दे देते हैं। हमारा मानना है कि ऑस्ट्रेलियाई लोगों के पास वास्तविक विकल्प होना चाहिए।" वन नेशन का दावा है कि हालिया चुनावी सफलताओं ने उसकी स्थिति को मजबूत किया है। पार्टी का लक्ष्य आने वाले चुनावों में लेबर के कब्जे वाली सीटों पर कड़ी चुनौती पेश करना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया में फंड जुटाना अब केवल संसाधनों का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह समर्थकों को लामबंद करने और अपनी विचारधारा को प्रचारित करने का एक प्रमुख हथियार बन गया है। आगामी चुनावों के मद्देनजर, यह प्रतिद्वंद्विता और भी तीव्र होने की संभावना है।
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