ऑस्ट्रेलिया
वन नेशन सांसद डेविड फार्ले ने गलती से ग्रीन्स के पक्ष में किया मतदान, अनुभव की कमी और स्टाफ की किल्लत को बताया कारण
ICN24 Newsroom 24 जून 2026, 05:25 pm

वन नेशन के नए सांसद डेविड फार्ले ने ईंधन कर क्रेडिट कम करने के पक्ष में मतदान करने के बाद माफी मांगी है, जिसे उन्होंने एक 'अनजाने में हुई गलती' बताया है।
ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में एक दुर्लभ और चौंकाने वाली घटना में, वन नेशन पार्टी के नवनिर्वाचित सांसद डेविड फार्ले ने संसद में एक महत्वपूर्ण मतदान के दौरान बड़ी चूक कर दी। फार्ले ने गलती से ग्रीन्स और 'टील' (Teal) निर्दलीय सांसदों के उस प्रस्ताव का समर्थन कर दिया, जो खनन और कृषि क्षेत्र के लिए दिए जाने वाले ईंधन कर क्रेडिट (Fuel Tax Credits) को वापस लेने या कम करने की मांग करता है।
इस मतदान के तुरंत बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई, क्योंकि वन नेशन पार्टी पारंपरिक रूप से खनन और ग्रामीण क्षेत्रों के हितों की कट्टर समर्थक रही है। अपनी इस गलती पर सफाई देते हुए, फार्ले ने इसे अपना 'रूकी' (नवागंतुक) होना बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पास पर्याप्त प्रशासनिक स्टाफ नहीं है, जिसके कारण वह विधायी प्रक्रियाओं की जटिलताओं को पूरी तरह से समझ नहीं पाए। फार्ले ने कहा कि वह इस प्रस्ताव का विरोध करना चाहते थे, लेकिन तकनीकी रूप से वह गलत खेमे में जाकर बैठ गए।
खनन उद्योग और विपक्षी गठबंधन (Coalition) ने इस कदम की तीखी आलोचना की है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन कर क्रेडिट में किसी भी प्रकार की कटौती से परिवहन और खेती की लागत में भारी वृद्धि हो सकती है। ऑस्ट्रेलियाई भारतीय समुदाय के लिए यह मुद्दा विशेष महत्व रखता है। ऑस्ट्रेलिया के क्षेत्रीय क्षेत्रों (Regional Australia) में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई किसान और ट्रक व्यवसाय से जुड़े उद्यमी इस कर योजना पर काफी हद तक निर्भर हैं। डीजल की कीमतों में संभावित वृद्धि सीधे तौर पर उनके मुनाफे और आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकती है।
विपक्ष के नेताओं ने इस घटना को वन नेशन की 'अपरिपक्वता' करार दिया है। लिबरल और नेशनल पार्टी के सदस्यों ने तर्क दिया कि इस तरह की गलतियां यह दर्शाती हैं कि छोटे दलों के पास देश चलाने के लिए आवश्यक गंभीरता और संसाधन नहीं हैं। दूसरी ओर, ग्रीन्स ने फार्ले के इस अनपेक्षित समर्थन का स्वागत किया, हालांकि वे भी जानते थे कि यह एक मानवीय त्रुटि थी।
डेविड फार्ले ने भविष्य में अधिक सतर्क रहने का वादा किया है और अपनी पार्टी के समर्थकों को आश्वस्त किया है कि वह किसानों और खनिकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालांकि, संसद के रिकॉर्ड में यह वोट दर्ज हो चुका है, जो आने वाले समय में उनके राजनीतिक करियर के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। भारतीय मूल के व्यवसायी जो कृषि मशीनरी और लॉजिस्टिक्स में निवेश कर रहे हैं, वे इस तरह के विधायी बदलावों पर कड़ी नजर रख रहे हैं, क्योंकि इससे उनकी परिचालन लागत में हजारों डॉलर का अंतर आ सकता है।
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