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'काम नहीं, तो वेतन नहीं': भोपाल नगर निगम ने 900 कर्मचारियों की ₹1.2 करोड़ की सैलरी रोकी

ICN24 Newsroom 5 जुल॰ 2026, 08:31 am
'काम नहीं, तो वेतन नहीं': भोपाल नगर निगम ने 900 कर्मचारियों की ₹1.2 करोड़ की सैलरी रोकी

भोपाल नगर निगम ने अनुपस्थित रहने वाले 900 कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए उनकी ₹1.2 करोड़ की सैलरी रोक दी है और आईडी ब्लॉक कर दिए हैं।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नगर निगम (BMC) प्रशासन ने अनुशासनहीनता और काम के प्रति लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ एक बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। निगम प्रशासन ने 'नो वर्क, नो पे' (काम नहीं तो वेतन नहीं) के सिद्धांत को कड़ाई से लागू करते हुए करीब 900 कर्मचारियों का वेतन रोक दिया है। इस कार्रवाई के तहत कुल 1.2 करोड़ रुपये की राशि फ्रीज कर दी गई है। भोपाल नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई हाल ही में की गई उपस्थिति रिकॉर्ड की गहन समीक्षा के बाद की गई है। नगर निगम ने शहर की सफाई व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यों में सुस्ती को देखते हुए उपस्थिति डेटा की जांच शुरू की थी। इस जांच में पाया गया कि बड़ी संख्या में कर्मचारी बिना किसी पूर्व सूचना के लंबे समय से अपने कार्यस्थल से नदारद थे। अधिकारियों ने बताया कि इस जांच के लिए अलग-अलग मानक तय किए गए थे। समीक्षा के दौरान पाया गया कि कुछ कर्मचारी ऐसे थे जिनकी महीने भर में उपस्थिति मात्र तीन दिन या उससे भी कम थी। ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ सबसे सख्त रुख अपनाते हुए उनके आधिकारिक लॉग-इन आईडी ब्लॉक कर दिए गए हैं। वहीं, जिन कर्मचारियों की उपस्थिति महीने में 10 दिन के आसपास पाई गई है, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। जब तक ये कर्मचारी अपनी अनुपस्थिति का ठोस और संतोषजनक कारण नहीं बताते, तब तक उनका वेतन जारी नहीं किया जाएगा। नगर निगम की इस सख्त कार्रवाई ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। गौरतलब है कि भोपाल नगर निगम लंबे समय से वित्तीय चुनौतियों और सफाई रैंकिंग में सुधार के दबाव से जूझ रहा है। ऐसे में प्रशासन अब मैनपावर (मानव संसाधन) का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल निगरानी और बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली पर जोर दे रहा है। निगम के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई कर्मचारी फील्ड वर्क के नाम पर ड्यूटी से गायब रहते थे, लेकिन अब जीपीएस और डिजिटल हाजिरी के माध्यम से उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर भारत में हो रहे प्रशासनिक सुधारों की एक झलक पेश करती है। ऑस्ट्रेलिया में जहां कार्यस्थल पर अनुशासन और 'अकाउंटेबिलिटी' को प्राथमिकता दी जाती है, भारत के स्थानीय निकायों में इस तरह की पारदर्शिता लाने के प्रयास प्रवासी भारतीयों के बीच भी चर्चा का विषय रहते हैं। भोपाल की यह कार्रवाई अन्य नगर निगमों के लिए भी एक मिसाल बन सकती है, जहां वेतन के बदले काम सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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