राजनीति
"आरक्षण पर डॉ. अंबेडकर की सलाह मानें तो कोई विवाद नहीं": मोहन भागवत ने सामाजिक समरसता पर दिया जोर
ICN24 Newsroom 7 अग॰ 2026, 11:38 am

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि यदि समाज डॉ. बी.आर. अंबेडकर के आरक्षण संबंधी सुझावों का पालन करे, तो कोई समस्या नहीं होगी। उन्होंने समर्थ वर्गों से लाभ दूसरों तक पहुँचाने का आह्वान किया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने आरक्षण के संवेदनशील मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा है कि यदि देश बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा दी गई सलाह का ईमानदारी से पालन करे, तो समाज में कोई संघर्ष या समस्या उत्पन्न नहीं होगी। नागपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने स्पष्ट किया कि आरक्षण का मुख्य उद्देश्य समाज के उन वर्गों का उत्थान करना है जो ऐतिहासिक रूप से पिछड़े रहे हैं।
भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि आरक्षण केवल एक संवैधानिक प्रावधान नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने का एक साधन है। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने आरक्षण की व्यवस्था इसलिए की थी ताकि समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाया जा सके। उनके अनुसार, आरक्षण तब तक जारी रहना चाहिए जब तक समाज में असमानता विद्यमान है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो लोग इस व्यवस्था का लाभ उठाकर अब सक्षम हो चुके हैं, उन्हें स्वेच्छा से आगे आकर अन्य जरूरतमंदों के लिए रास्ता बनाना चाहिए।
संघ प्रमुख ने 'लाभों को आगे बढ़ाने' (Pass on the benefits) के विचार को साझा करते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति या परिवार आरक्षण के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त हो जाता है, तो उसे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। उन्होंने कहा, "अगर हम स्वार्थ त्याग कर केवल उन लोगों के बारे में सोचें जिन्हें वास्तव में मदद की जरूरत है, तो आरक्षण का वास्तविक उद्देश्य सिद्ध होगा।" उन्होंने राजनीतिक दलों द्वारा आरक्षण के मुद्दे को चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति की भी आलोचना की और इसे समाज को बांटने वाला बताया।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भारत के ऐसे सामाजिक और राजनीतिक विमर्श काफी महत्वपूर्ण होते हैं। यहाँ का प्रवासी भारतीय समुदाय, जो अपनी जड़ों से गहराई से जुड़ा है, अक्सर भारत की आरक्षण नीतियों और उनके सामाजिक प्रभावों पर चर्चा करता है। मोहन भागवत का यह बयान उन लोगों के बीच एक नई बहस छेड़ सकता है जो योग्यता (मेरिट) और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन की तलाश में रहते हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में सक्रिय भारतीय संगठन अक्सर ऐसे मुद्दों पर संगोष्ठियाँ आयोजित करते हैं, जहाँ भारतीय संवैधानिक मूल्यों और आधुनिक भारत की चुनौतियों पर विचार-विमर्श होता है।
अंत में, भागवत ने सामाजिक समरसता का आह्वान करते हुए कहा कि समाज को जातियों में विभाजित होने के बजाय एक इकाई के रूप में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर का सपना एक ऐसे भारत का था जहाँ बंधुत्व सर्वोपरि हो। यदि हम उनके बताए मार्ग पर चलते हुए आरक्षण का क्रियान्वयन करते हैं, तो यह समाज को जोड़ने का काम करेगा, न कि तोड़ने का। भागवत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत के कई राज्यों में आरक्षण को लेकर विभिन्न समुदायों के बीच विरोध और मांगें तेज हो रही हैं।
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