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चीन के मिसाइल परीक्षण पर प्रशांत देशों की बैठक; क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता पर छिड़ी गंभीर बहस

ICN24 Newsroom 7 अग॰ 2026, 10:37 am
चीन के मिसाइल परीक्षण पर प्रशांत देशों की बैठक; क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता पर छिड़ी गंभीर बहस

प्रशांत द्वीप देशों के मंत्री चीन के हालिया मिसाइल परीक्षण पर एक संयुक्त बयान जारी करने के लिए विचार-विमर्श कर रहे हैं, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रशांत द्वीप देशों के विदेश मंत्रियों ने बीजिंग द्वारा हाल ही में किए गए अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) परीक्षण के जवाब में एक सामूहिक रुख अपनाने के लिए चर्चा शुरू की है। यह परीक्षण, जो दशकों में अपनी तरह का पहला था, ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। कुक आइलैंड्स में होने वाली इस बैठक का उद्देश्य यह तय करना है कि क्या प्रशांत द्वीप समूह मंच (PIF) को चीन की इस सैन्य गतिविधि के खिलाफ एक औपचारिक बयान जारी करना चाहिए। चीन ने पिछले महीने प्रशांत महासागर में एक ICBM का सफल परीक्षण किया था, जो पिछले 44 वर्षों में इस तरह का पहला वाकया था। हालांकि बीजिंग का दावा है कि यह एक नियमित अभ्यास था और किसी विशेष देश को लक्षित नहीं किया गया था, लेकिन इस कदम ने ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कई छोटे प्रशांत देशों को सतर्क कर दिया है। प्रशांत क्षेत्र के कई नेताओं का मानना है कि इस तरह के परीक्षण क्षेत्र की शांति और 'ब्लू पैसिफिक' की अवधारणा के खिलाफ हैं। ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की है, और वह क्षेत्र के अन्य नेताओं के साथ मिलकर एक संतुलित प्रतिक्रिया तैयार करने की कोशिश कर रही हैं। ऑस्ट्रेलिया के लिए, यह मामला केवल सुरक्षा का नहीं बल्कि क्षेत्रीय प्रभाव का भी है। कैनबरा लगातार यह तर्क देता रहा है कि प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियों का समाधान 'पैसिफिक परिवार' के भीतर ही होना चाहिए, जिसमें बाहरी शक्तियों का हस्तक्षेप न्यूनतम हो। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और 'इंडो-पैसिफिक' विजन के तहत, नई दिल्ली ने हाल के वर्षों में प्रशांत द्वीप देशों के साथ अपने संबंधों को काफी प्रगाढ़ किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स को-ऑपरेशन' (FIPIC) के प्रति प्रतिबद्धता यह दर्शाती है कि भारत इस क्षेत्र में एक स्थिर और नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थक है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए, क्षेत्रीय स्थिरता का अर्थ बेहतर आर्थिक संबंध और सुरक्षित व्यापारिक मार्ग है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशांत देशों के बीच इस मुद्दे पर एकमत होना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सोलोमन द्वीप जैसे कुछ देशों के चीन के साथ गहरे सुरक्षा संबंध हैं, जबकि पलाऊ और मार्शल द्वीप जैसे देश अमेरिका के साथ मजबूती से खड़े हैं। यदि मंत्री एक कड़े बयान पर सहमत होते हैं, तो यह प्रशांत क्षेत्र की भू-राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा। यह इस बात का संकेत होगा कि छोटे द्वीप राष्ट्र अब अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं को लेकर अधिक मुखर हो रहे हैं और किसी भी महाशक्ति के दबाव में आने के लिए तैयार नहीं हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या प्रशांत द्वीप समूह मंच एक स्वर में चीन की सैन्य महत्वाकांक्षाओं पर अपनी असहमति दर्ज करा पाता है। इस बहस का परिणाम न केवल ऑस्ट्रेलिया की कूटनीति की परीक्षा लेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि आने वाले समय में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन किस ओर झुकता है।
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