राजनीति
ओडिशा: युवाओं को जागरूक करने के लिए 'चुनावी साक्षरता क्लब' को सक्रिय करने के निर्देश
ICN24 Newsroom 7 अग॰ 2026, 12:37 pm

ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला चुनाव अधिकारियों को चुनावी साक्षरता क्लबों को पुनर्जीवित करने और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
भुवनेश्वर: ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) निकुंज बिहारी धाल ने राज्य के सभी जिला चुनाव अधिकारियों (डीईओ) को चुनावी साक्षरता क्लबों (ईएलसी) को तत्काल प्रभाव से सक्रिय और विस्तारित करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले युवाओं और भावी मतदाताओं के बीच चुनावी प्रक्रिया के प्रति जागरूकता पैदा करना और लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा देना है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने हाल ही में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया कि राज्य के हर विधानसभा क्षेत्र में इन क्लबों का सक्रिय होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि ईएलसी केवल कागजों पर सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से कार्य करना होगा। जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति सुनिश्चित करें ताकि युवाओं को मतदाता पंजीकरण और मतदान के महत्व के बारे में व्यवस्थित रूप से शिक्षित किया जा सके।
यह कदम आगामी चुनावों और हाल के वर्षों में युवाओं के बीच घटते मतदान प्रतिशत को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 18-19 वर्ष के आयु वर्ग के कई पात्र युवा अभी भी विभिन्न कारणों से मतदाता सूची से बाहर हैं। ईएलसी के माध्यम से चुनाव आयोग 'किसी भी मतदाता को पीछे न छोड़ने' के अपने व्यापक मिशन को साकार करना चाहता है। ये क्लब न केवल छात्रों को ईवीएम (EVM) और वीवीपीएटी (VVPAT) की कार्यप्रणाली समझाएंगे, बल्कि उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक करेंगे।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया में मतदान एक अनिवार्य कानूनी जिम्मेदारी (Compulsory Voting) है, जबकि भारत में यह स्वैच्छिक है। ऐसे में भारतीय प्रवासियों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि भारत अपनी युवा पीढ़ी को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में स्वेच्छा से शामिल करने के लिए किस प्रकार के नवाचार कर रहा है। प्रवासी भारतीय, जो अक्सर भारत में अपने परिजनों और युवा पीढ़ी के साथ जुड़े रहते हैं, ऐसी नागरिक शिक्षा (Civic Education) पहलों को लोकतांत्रिक मूल्यों के सुदृढ़ीकरण के रूप में देखते हैं।
जिला चुनाव अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे सामाजिक संगठनों और नागरिक समाज के समूहों के साथ मिलकर दूरदराज के क्षेत्रों में इन क्लबों का विस्तार करें। इन क्लबों में चर्चाओं, प्रतियोगिताओं और 'मॉक पोल' जैसे इंटरैक्टिव सत्रों का आयोजन किया जाएगा ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को युवाओं के लिए सरल और आकर्षक बनाया जा सके। चुनाव आयोग का लक्ष्य है कि आने वाले समय में हर युवा न केवल एक जागरूक मतदाता बने, बल्कि समाज में लोकतांत्रिक मूल्यों का वाहक भी बने।
राज्य के शिक्षा विभाग के साथ समन्वय स्थापित करते हुए, यह योजना बनाई गई है कि चुनावी साक्षरता को पाठ्यक्रम की गतिविधियों का हिस्सा बनाया जाए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि जब छात्र 18 वर्ष की आयु प्राप्त करें, तो वे पहले से ही अपनी राजनीतिक शक्ति और मतदान की प्रक्रिया से पूरी तरह परिचित हों। ओडिशा प्रशासन अब इन निर्देशों के अनुपालन की साप्ताहिक समीक्षा करेगा ताकि इस अभियान की सफलता सुनिश्चित की जा सके।
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