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इज़राइल-हिज़बुल्लाह संघर्ष विराम के बीच टायर में मुहर्रम: खंडहरों के बीच अपनों को याद कर रहे हैं मातमी

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 09:52 am
इज़राइल-हिज़बुल्लाह संघर्ष विराम के बीच टायर में मुहर्रम: खंडहरों के बीच अपनों को याद कर रहे हैं मातमी

लेबनान के टायर शहर में इज़राइल-हिज़बुल्लाह संघर्ष विराम के बाद मुहर्रम की शोक सभाएं आयोजित की जा रही हैं, जहाँ लोग मलबे के बीच अपनों को याद कर रहे हैं।

लेबनान के ऐतिहासिक तटीय शहर टायर (Tyre) में इस वर्ष मुहर्रम का दृश्य अत्यंत भावुक और पीड़ादायक है। इज़राइल और हिज़बुल्लाह के बीच हाल ही में हुए संघर्ष विराम की खबरों के बाद, यहाँ के शिया मुस्लिम समुदाय के लोग अपने उन परिजनों को याद करने के लिए एकत्र हुए हैं जिन्होंने हालिया हिंसा में अपनी जान गंवाई है। युद्ध की विभीषिका झेल रहे इस शहर में मुहर्रम की शोक सभाएं केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि युद्ध के घावों को सहलाने का एक जरिया बन गई हैं। टायर की गलियों में जहाँ कभी चहल-पहल रहती थी, वहाँ अब मलबे के ढेर और ढह चुकी इमारतों के अवशेष दिखाई दे रहे हैं। इन खंडहरों के बीच काले लिबास में सजे शोक संतप्त लोग इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए अपने व्यक्तिगत नुकसान का मातम मना रहे हैं। संघर्ष विराम के बाद कई परिवार अपने घरों को वापस लौटे हैं, लेकिन उन्हें वहां केवल यादें और विनाश मिला है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मुहर्रम का संदेश धैर्य और न्याय के लिए खड़े होना है, जो इस समय उनके लिए पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए, विशेष रूप से सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले शिया समुदाय के लिए, टायर से आने वाली ये तस्वीरें गहरी संवेदना पैदा करती हैं। ऑस्ट्रेलिया में भी मुहर्रम के दौरान विशेष सभाएं (मजलिस) आयोजित की जाती हैं, जहाँ दुनिया भर में हो रहे संघर्षों और उनके मानवीय प्रभाव पर चर्चा होती है। लेबनान से गहरे सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध रखने वाले ऑस्ट्रेलियाई प्रवासियों के लिए टायर की यह स्थिति उनके अपने संघर्ष और पहचान का हिस्सा बन गई है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यद्यपि संघर्ष विराम ने तात्कालिक राहत प्रदान की है, लेकिन टायर जैसे शहरों का पुनर्निर्माण एक लंबी और कठिन प्रक्रिया होगी। मुहर्रम की ये सभाएं समुदाय की एकजुटता और लचीलेपन का प्रतीक हैं। शोक मना रहे लोगों का कहना है कि वे इस पवित्र महीने के माध्यम से दुनिया को यह बताना चाहते हैं कि युद्ध चाहे कितना भी विनाशकारी क्यों न हो, उनकी आस्था और अपनों के प्रति प्रेम को मिटाया नहीं जा सकता। जैसे-जैसे आशूरा के दिन नजदीक आ रहे हैं, टायर में सुरक्षा व्यवस्था और भी संवेदनशील बनी हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, संघर्ष विराम के बावजूद क्षेत्र में तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालांकि, स्थानीय लोग अपनी धार्मिक आस्था को निभाते हुए शांति की प्रार्थना कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि भविष्य में उन्हें फिर कभी ऐसी तबाही का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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