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गलतियां हार नहीं, खुद पर यकीन ही कामयाबी की चाबी है: फीफा वर्ल्ड कप चर्चा के बीच जस्टिन बीबर का बड़ा संदेश

ICN24 Newsroom 12 जुल॰ 2026, 11:31 am
गलतियां हार नहीं, खुद पर यकीन ही कामयाबी की चाबी है: फीफा वर्ल्ड कप चर्चा के बीच जस्टिन बीबर का बड़ा संदेश

ग्लोबल सुपरस्टार जस्टिन बीबर ने मानसिक स्वास्थ्य और पुरानी गलतियों से उबरने पर अपने विचार साझा किए हैं, जो हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा हैं जो खुद को कमजोर महसूस करता है।

ग्लोबल पॉप आइकन जस्टिन बीबर इन दिनों फीफा वर्ल्ड कप की फाइनल सेरेमनी में अपनी संभावित परफॉर्मेंस और अपनी वापसी को लेकर सुर्खियों में हैं। संगीत की दुनिया के इस सुपरस्टार का सफर जितना चमकदार रहा है, उतना ही उतार-चढ़ाव भरा भी। हाल ही में विभिन्न साक्षात्कारों के दौरान बीबर ने अपनी जिंदगी के उन अंधेरे कोनों पर बात की, जिनसे वह वर्षों तक जूझते रहे। उनका यह संदेश न केवल उनके प्रशंसकों के लिए, बल्कि विशेष रूप से भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के उन युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो सफलता और अपेक्षाओं के भारी दबाव में जीते हैं। बीबर ने अपनी बात की शुरुआत एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दे से की—पुरानी गलतियां। उन्होंने कहा, "अगर आज आप खुद को कमजोर महसूस कर रहे हैं या आपको लगता है कि आपकी पुरानी गलतियां ही आपकी पहचान बन चुकी हैं, तो मेरी बात ध्यान से सुनें। मैंने भी जिंदगी में कई ऐसे फैसले लिए हैं जिन पर मुझे आज भी शर्मिंदगी होती है। लेकिन मैंने यह समझ लिया है कि अगर मैं अपनी पिछली नाकामियों को ही अपनी किस्मत मान लूं, तो आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं बचेगा।" उन्होंने स्पष्ट किया कि बीता हुआ कल कभी यह तय नहीं करना चाहिए कि आप आज दूसरों के लिए क्या कर सकते हैं। बचपन से ही शोहरत की बुलंदियों पर रहने वाले बीबर ने उस कीमत के बारे में भी बताया जो उन्होंने इस कामयाबी के लिए चुकाई। महज एक बच्चे की उम्र में उन पर काम का इतना बोझ था कि वह अंदर से टूटने लगे थे। बीबर ने एक बेहद निजी किस्सा साझा करते हुए बताया कि एक बार उन्होंने अपना पासपोर्ट तक छिपा दिया था, ताकि वह कुछ दिन एक सामान्य बच्चे की तरह जी सकें और भाग-दौड़ भरी जिंदगी से दूर रह सकें। यह अनुभव दर्शाता है कि कभी-कभी सबसे बड़ी कामयाबी भी इंसान को मानसिक रूप से थका देती है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए बीबर की यह सीख काफी प्रासंगिक है। अक्सर नए देश में स्थापित होने और करियर की दौड़ में हम अपना मानसिक सुकून खो देते हैं। बीबर कहते हैं, "मंजिल के पीछे भागते वक्त अपना सुकून बचाकर रखें। दुनिया आपको कभी पूरी तरह खुश नहीं कर सकती। जब आप हर किसी को खुश करने की कोशिश करते हैं, तो सबसे पहले आप खुद को खो देते हैं।" अपने सबसे कठिन दौर को याद करते हुए गायक ने बताया कि एक समय ऐसा था जब उन्हें अपनी जान का डर सताने लगा था। बाहर से सब कुछ शानदार दिखने के बावजूद उनके अंदर खालीपन और बेचैनी थी। उन्होंने सीखा कि बाहरी दुनिया की तारीफों से ज्यादा जरूरी आपके रिश्तों का अपनापन और दिल का भरोसा है। उन्होंने अंत में 'कृतज्ञता' (शुक्रगुजारी) पर जोर देते हुए कहा कि जिंदगी में दर्द और अनसुलझे सवाल हमेशा रहेंगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हमारे पास ईश्वर की दी हुई नेमतें नहीं हैं। मुश्किलों के बीच भी शुक्र अदा करना सीखना ही असल जीत है।
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