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पुरी में उमड़ा जनसैलाब: भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा शुरू, लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई हाजिरी

ICN24 Newsroom 16 जुल॰ 2026, 11:32 am
पुरी में उमड़ा जनसैलाब: भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा शुरू, लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई हाजिरी

ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथ यात्रा शुरू हो गई है। लाखों श्रद्धालु रथ खींचने के लिए जुटे हैं, वहीं ऑस्ट्रेलिया में भी भारतीय समुदाय ने इस उत्सव को धूमधाम से मनाया।

ओडिशा की पवित्र नगरी पुरी आज भक्ति और श्रद्धा के सागर में डूबी नजर आई, जहां भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा की वार्षिक रथ यात्रा का भव्य शुभारंभ हुआ। इस विश्व प्रसिद्ध उत्सव को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु 'बड़ा डांडा' (Grand Road) पर एकत्रित हुए हैं। यह पावन पर्व न केवल भारत, बल्कि दुनिया भर में फैले हिंदू समुदाय के लिए आस्था का प्रतीक है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, आज सुबह 9:30 बजे 'पहांडी' अनुष्ठान के साथ उत्सव की शुरुआत हुई। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को मंदिर के गर्भगृह से अत्यंत उत्साह के साथ उनके विशाल लकड़ी के रथों पर विराजमान किया गया। पुरी के गजपति महाराजा द्वारा की जाने वाली 'छेरा पहंरा' की रस्म इस यात्रा का मुख्य आकर्षण रही, जिसमें उन्होंने सोने की झाड़ू से रथों की सफाई की। यह रस्म समानता का संदेश देती है कि भगवान की नजर में राजा और प्रजा सब एक समान हैं। शाम 4 बजे से रथों को खींचने की प्रक्रिया शुरू हुई। भगवान जगन्नाथ का रथ 'नंदीघोष', भगवान बलभद्र का 'तालध्वज' और देवी सुभद्रा का रथ 'दर्पदलन' भक्तों के जयकारों के बीच गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान कर चुका है। राज्य सरकार ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। भीड़ प्रबंधन और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हजारों पुलिस कर्मियों, रैपिड रिस्पांस टीम और स्वयंसेवकों को तैनात किया गया है। इस उत्सव की गूंज ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेषकर ओड़िया डायस्पोरा के बीच भी साफ देखी जा रही है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे प्रमुख शहरों में स्थित हिंदू मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिक इस मौके पर सामुदायिक भोज और भजन संध्या के जरिए अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं। वहां के स्थानीय मंदिरों में भी प्रतीकात्मक रथ यात्राएं निकाली जा रही हैं, जो प्रवासी भारतीयों के बीच सांस्कृतिक विरासत को संजोने का काम करती हैं। पुरी की यह रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक मानवीय समागम है जो विभिन्न संस्कृतियों और देशों के लोगों को एक सूत्र में पिरोता है। अगले नौ दिनों तक भगवान अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) में विश्राम करेंगे, जिसके बाद 'बहुड़ा यात्रा' के साथ उनकी घर वापसी होगी।
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