राजनीति
अमेरिका ने ईरान पर फिर किया हवाई हमला, होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
ICN24 Newsroom 16 जुल॰ 2026, 09:33 am

अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के लिए खतरा पैदा करने वाली ईरानी सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाते हुए हमलों का दूसरा दौर शुरू किया है।
वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिकी सेना ने बुधवार को ईरान के खिलाफ हवाई हमलों का एक और दौर शुरू किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा संचालित इन हमलों का मुख्य उद्देश्य उन सैन्य क्षमताओं को नष्ट करना था, जो सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए सीधा खतरा पैदा कर रही थीं। यह सैन्य कार्रवाई पिछले सप्ताह किए गए शुरुआती हमलों के बाद की गई है, जिससे मध्य पूर्व में क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, इन हमलों में उन रडार साइटों, ड्रोन अड्डों और मिसाइल प्रणालियों को निशाना बनाया गया है, जिनका उपयोग ईरान अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में यातायात को बाधित करने के लिए कर सकता था। यह कार्रवाई तब हुई है जब CENTCOM ईरानी बंदरगाहों पर एक प्रभावी नौसैनिक नाकाबंदी लागू करने की कोशिश कर रहा है। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि ये हमले रक्षात्मक प्रकृति के हैं और इनका उद्देश्य लाल सागर और ओमान की खाड़ी के बीच सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह घटनाक्रम अत्यधिक महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया अपनी ऊर्जा जरूरतों, विशेष रूप से ईंधन और पेट्रोलियम उत्पादों के लिए, अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर काफी हद तक निर्भर है। होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली किसी भी तरह की आपूर्ति बाधा सीधे तौर पर ऑस्ट्रेलिया में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को प्रभावित कर सकती है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक नौवहन उद्योग (Global Shipping Industry) में भारतीय नागरिकों की एक बड़ी संख्या कार्यरत है। मर्चेंट नेवी में काम करने वाले हजारों भारतीय नाविक इन क्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों पर तैनात हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर ऑस्ट्रेलिया में रह रहे उनके परिवारों के बीच चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और लंबा खिंचता है, तो इसके गंभीर आर्थिक परिणाम हो सकते हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे भारतीय प्रवासियों के लिए, जिनके व्यापारिक संबंध भारत और खाड़ी देशों से जुड़े हैं, यह अनिश्चितता का माहौल पैदा कर रहा है। भारत के लिए भी यह क्षेत्र ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है, क्योंकि भारत अपनी कच्चा तेल की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा यहीं से प्राप्त करता है। ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों ही 'क्वाड' (Quad) के सदस्य होने के नाते स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की वकालत करते हैं, जिसमें समुद्री सुरक्षा एक प्राथमिक स्तंभ है।
फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। जहां अमेरिका इसे अपनी सुरक्षा नीति का हिस्सा बता रहा है, वहीं ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कूटनीतिक रास्तों से इस तनाव को कम किया जा सकता है या फिर यह सैन्य टकराव एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले लेगा।
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