राजनीति
महाराष्ट्र में महिला किसानों के लिए ऐतिहासिक कानून: भूमि अधिकार और सरकारी योजनाओं में मिलेगी प्राथमिकता
ICN24 Newsroom 3 जुल॰ 2026, 05:31 am

महाराष्ट्र विधानसभा ने महिला किसानों को स्वतंत्र पहचान देने और उन्हें संपत्ति व सरकारी लाभों में समान अधिकार सुनिश्चित करने के लिए एक ऐतिहासिक विधेयक पारित किया है।
महाराष्ट्र विधानसभा ने राज्य के कृषि क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव लाते हुए ‘महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तीकरण और कल्याण विधेयक’ को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है। यह नया कानून न केवल महिला किसानों को एक स्वतंत्र पहचान प्रदान करता है, बल्कि उन्हें भूमि स्वामित्व, कृषि ऋण और सरकारी योजनाओं तक सीधी पहुंच सुनिश्चित करने का अधिकार भी देता है। दशकों से भारतीय कृषि की रीढ़ मानी जाने वाली महिलाओं के लिए यह एक वैधानिक मान्यता की दिशा में बड़ा कदम है।
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य उन लाखों महिलाओं को सशक्त बनाना है जो खेतों में दिन-रात मेहनत करती हैं, लेकिन भूमि के कागजात पर नाम न होने के कारण अक्सर ‘किसान’ की आधिकारिक परिभाषा से बाहर रह जाती हैं। नए प्रावधानों के तहत, राज्य सरकार महिला किसानों को विशेष पहचान पत्र जारी करेगी, जिससे उन्हें बैंकों से ऋण प्राप्त करने और सरकारी सब्सिडी का लाभ उठाने में आसानी होगी। अब तक, भूमि का मालिकाना हक न होने के कारण अधिकांश महिला किसान संस्थागत ऋण के बजाय साहूकारों पर निर्भर रहती थीं।
कानून की एक अन्य महत्वपूर्ण विशेषता भूमि उत्तराधिकार और स्वामित्व से संबंधित है। यह कानून सुनिश्चित करेगा कि महिला किसानों को पैतृक और वैवाहिक भूमि में उनका उचित हिस्सा मिले। अक्सर देखा गया है कि पति की मृत्यु के बाद महिलाओं को भूमि से बेदखल कर दिया जाता था, लेकिन अब यह विधेयक उन्हें कानूनी सुरक्षा कवच प्रदान करेगा। कृषि और राजस्व विभाग को निर्देश दिया गया है कि वे संयुक्त स्वामित्व (Joint Titles) को बढ़ावा दें ताकि परिवार की संपत्ति में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेषकर महाराष्ट्र से संबंध रखने वाले प्रवासियों के लिए यह कानून विशेष महत्व रखता है। कई एनआरआई परिवारों की कृषि भूमि अभी भी भारत में है, जिसका प्रबंधन अक्सर घर की महिलाएं करती हैं। इस कानून के लागू होने से उन महिलाओं को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और संपत्ति के हस्तांतरण या प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी। यह उन प्रवासियों के लिए भी राहत की बात है जो अपनी बहनों या माताओं को भारत में भूमि अधिकारों के मामले में आत्मनिर्भर देखना चाहते हैं।
विधेयक में महिला किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, उन्नत बीज और आधुनिक कृषि उपकरणों की उपलब्धता में भी आरक्षण की व्यवस्था की गई है। महाराष्ट्र सरकार का यह कदम अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल बन सकता है। जानकारों का मानना है कि जब तक महिलाओं को कृषि क्षेत्र में निर्णय लेने की प्रक्रिया और वित्तीय संसाधनों पर नियंत्रण नहीं मिलता, तब तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था का पूर्ण विकास संभव नहीं है। यह कानून उसी दिशा में एक ठोस प्रयास है।
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