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महाराष्ट्र: हाउसिंग सोसायटियों के लिए नए 'मॉडल बाय-लॉज 2026' का ड्राफ्ट जारी, जनता से मांगे गए सुझाव
ICN24 Newsroom 15 अग॰ 2026, 02:37 pm

महाराष्ट्र सरकार ने सहकारी आवास सोसायटियों के लिए 'मॉडल बाय-लॉज 2026' का मसौदा जारी कर दिया है। इसमें पुनर्विकास और डिजिटल गवर्नेंस पर विशेष जोर दिया गया है।
महाराष्ट्र सरकार के सहकारिता विभाग ने राज्य की सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं (Co-operative Housing Societies) के सुचारू संचालन के लिए 'मॉडल बाय-लॉज 2026' (आदर्श उप-नियम) का मसौदा तैयार कर लिया है। इस नए कानूनी ढांचे को अब सार्वजनिक परामर्श के लिए खोल दिया गया है, जिसका उद्देश्य दशकों पुराने नियमों को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप ढालना है। यह कदम विशेष रूप से उन लाखों संपत्ति मालिकों के लिए महत्वपूर्ण है जो मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे बड़े शहरों में फ्लैट के मालिक हैं।
प्रस्तावित उप-नियमों में आवासीय सोसायटियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने और विवादों को कम करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। नए मसौदे में पुनर्विकास (Redevelopment) की प्रक्रियाओं को सरल बनाने और ई-वोटिंग जैसे डिजिटल माध्यमों को अपनाने का प्रावधान किया गया है। महाराष्ट्र सरकार का मानना है कि इन बदलावों से सोसायटियों के भीतर होने वाली गुटबाजी और प्रशासनिक बाधाओं में कमी आएगी।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय (NRIs) के लिए यह खबर विशेष रूप से प्रासंगिक है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले कई भारतीय प्रवासियों ने महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों में निवेश कर रखा है। अब तक, विदेशी धरती पर बैठे निवेशकों के लिए अपनी सोसाइटी की वार्षिक आम बैठकों (AGM) में भाग लेना या महत्वपूर्ण निर्णयों में वोट देना एक बड़ी चुनौती थी। नए नियमों के तहत डिजिटल भागीदारी और ऑनलाइन संचार को कानूनी मान्यता मिलने से प्रवासी भारतीयों के लिए अपनी संपत्तियों का प्रबंधन करना और उनके अधिकारों की रक्षा करना आसान हो जाएगा।
मसौदे में रखरखाव शुल्क (Maintenance Charges), पार्किंग नीतियों और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना जैसे समकालीन विषयों पर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, सोसायटियों के ऑडिट और रिकॉर्ड के रखरखाव को पूरी तरह से डिजिटल बनाने का प्रस्ताव है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी।
राज्य सरकार ने नागरिकों, हितधारकों और कानूनी विशेषज्ञों से इस मसौदे पर अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराने की अपील की है। सार्वजनिक प्रतिक्रिया के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की गई है, जिसके बाद इन सुझावों की समीक्षा की जाएगी और अंतिम नियमों को अधिसूचित किया जाएगा। जानकारों का कहना है कि 2026 के ये नियम महाराष्ट्र के रियल एस्टेट सेक्टर और हाउसिंग कल्चर में एक मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।
यह पहल उस समय हुई है जब महाराष्ट्र में पुरानी इमारतों के पुनर्विकास की लहर चल रही है। नए नियमों में सेल्फ-रीडेवलपमेंट को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जो उन सोसायटियों के लिए वरदान साबित हो सकते हैं जो बिल्डरों के बजाय खुद अपनी इमारत का पुनर्निर्माण करना चाहती हैं। ICN24 की सलाह है कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले महाराष्ट्र के संपत्ति मालिक इस मसौदे का अध्ययन करें और अपने हितों की रक्षा के लिए सक्रिय रूप से फीडबैक प्रक्रिया में भाग लें।
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