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असम: मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को जान से मारने की धमकी देने वाला व्यक्ति गिरफ्तार, मांगी थी 1 करोड़ की 'सुपारी'
ICN24 Newsroom 16 अग॰ 2026, 04:37 pm
असम पुलिस ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को सोशल मीडिया पर जान से मारने की धमकी देने के आरोप में तिनसुकिया से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।
असम पुलिस ने राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जान से मारने की धमकी देने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान तिनसुकिया जिले के चंपक बोरा के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, बोरा ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए यह दावा किया था कि वह मुख्यमंत्री की हत्या कर देगा यदि उसे इसके लिए 1 करोड़ रुपये दिए जाएं। यह मामला सामने आने के बाद राज्य की सुरक्षा एजेंसियों और साइबर सेल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को धर दबोचा।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी ने अपनी पोस्ट में सीधे तौर पर मुख्यमंत्री को निशाना बनाया था। इस पोस्ट के वायरल होते ही तिनसुकिया पुलिस और असम पुलिस की साइबर विंग सक्रिय हो गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के डिजिटल फुटप्रिंट्स को ट्रैक करने के बाद उसे उसके आवास से हिरासत में लिया गया। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या आरोपी किसी कट्टरपंथी समूह से जुड़ा है या उसने केवल ध्यान आकर्षित करने के लिए ऐसा किया था।
असम में हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट और धमकियों को लेकर पुलिस प्रशासन काफी सख्त रुख अपना रहा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, जो अपनी स्पष्टवादिता और कड़े प्रशासनिक निर्णयों के लिए जाने जाते हैं, पहले भी कई बार उग्रवादी संगठनों और असामाजिक तत्वों के निशाने पर रहे हैं। हालांकि, इस बार एक आम नागरिक द्वारा सरेआम सोशल मीडिया पर इस तरह की 'सुपारी' वाली बात कहना सुरक्षा के लिहाज से एक गंभीर चुनौती माना जा रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के तहत इस तरह के अपराधों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से जान से मारने की धमकी देना न केवल कानून-व्यवस्था के लिए खतरा है, बल्कि यह समाज में भय पैदा करने की कोशिश भी है। तिनसुकिया के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया की निगरानी बढ़ाई जा रही है और ऐसे किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय और प्रवासी भारतीयों (NRIs) के लिए भी यह खबर एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर आपकी एक टिप्पणी या पोस्ट गंभीर कानूनी संकट पैदा कर सकती है। भारतीय मूल के लोग जो नियमित रूप से भारतीय राजनीति पर चर्चा करते हैं, उनके लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आपराधिक धमकी के बीच एक महीन रेखा होती है। सुरक्षा विशेषज्ञों का सुझाव है कि सोशल मीडिया का उपयोग जिम्मेदारी से किया जाना चाहिए, क्योंकि डिजिटल दुनिया में की गई कोई भी गतिविधि पुलिस और जांच एजेंसियों की नजर से छिपी नहीं रहती।
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