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UCC के विरोध में मध्य प्रदेश में बड़ा आंदोलन: 16 अगस्त से सड़क पर उतरेगा मुस्लिम समाज, भोपाल में रणनीति तैयार
ICN24 Newsroom 11 अग॰ 2026, 03:37 am

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) के खिलाफ मुस्लिम समाज और सामाजिक संगठनों ने 16 से 20 अगस्त तक बड़े आंदोलन का ऐलान किया है, जिसमें महिलाओं की प्रमुख भूमिका होगी।
भोपाल: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मी तेज हो गई है। मुस्लिम समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस प्रस्तावित कानून के विरोध में प्रदेश व्यापी आंदोलन छेड़ने का निर्णय लिया है। यह आंदोलन आगामी 16 अगस्त से शुरू होकर 20 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान प्रदेश के सभी जिलों में मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि जिला कलेक्टरों के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाएंगे।
इस रणनीति का खुलासा कांग्रेस विधायक और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य आरिफ मसूद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किया। मसूद ने बताया कि आंदोलन के दौरान प्रत्येक जिले में 21 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर से मुलाकात करेगा और राष्ट्रपति के नाम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेगा। इस आंदोलन की एक खास विशेषता यह है कि इन 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडलों में 17 महिलाएं शामिल होंगी, जो इस मुद्दे पर महिला समाज की चिंताओं को प्रमुखता से रखेंगी।
विधायक आरिफ मसूद ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 हर नागरिक को अपने धर्म के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता देता है। उन्होंने तर्क दिया कि यूसीसी का वर्तमान मसौदा सीधे तौर पर अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत कानूनों को प्रभावित करता है। मसूद के अनुसार, सरकार को इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई भी कदम उठाने से पहले व्यापक चर्चा करनी चाहिए थी और सभी समुदायों के हितों का ध्यान रखना चाहिए था।
आंदोलन के दूसरे चरण की रूपरेखा भी तैयार कर ली गई है। 21 अगस्त से पूरे प्रदेश में 'संवाद कार्यक्रम' शुरू किया जाएगा। इसके तहत मुस्लिम समाज न केवल अपने समुदाय के भीतर, बल्कि अन्य धर्मों और समुदायों के लोगों से भी चर्चा करेगा ताकि यूसीसी के प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाई जा सके। मसूद ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल एक धर्म विशेष का नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों को बचाने की एक लोकतांत्रिक लड़ाई है।
इससे पहले, आरिफ मसूद ने मध्य प्रदेश विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने सदन में एक संशोधन प्रस्ताव पेश कर मांग की थी कि यूसीसी से जुड़े विषयों को एक 'प्रवर समिति' (Select Committee) के पास भेजा जाए ताकि इस पर विस्तार से चर्चा हो सके। हालांकि, सरकार ने इस मांग को खारिज कर दिया। मसूद ने कहा कि जब सरकार सदन के भीतर विपक्ष और जनता की आवाज सुनने से इनकार कर देती है, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के बीच जाकर अपनी बात रखना ही एकमात्र विकल्प बचता है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत में कानूनी और सामाजिक ढांचे में होने वाले किसी भी बड़े बदलाव का असर प्रवासी भारतीयों की सामाजिक समझ और वहां होने वाली चर्चाओं पर भी पड़ता है। भारत में धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों को लेकर जारी यह बहस वैश्विक स्तर पर भारतीय लोकतंत्र की छवि और विविधता के संरक्षण के प्रयासों के रूप में देखी जा रही है।
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