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लिथुआनिया में 'कॉर्गी रेस' की धूम: नन्हे पैरों की दौड़ और अनोखे फैशन ने जीता सबका दिल

ICN24 Newsroom 16 अग॰ 2026, 06:37 am
लिथुआनिया में 'कॉर्गी रेस' की धूम: नन्हे पैरों की दौड़ और अनोखे फैशन ने जीता सबका दिल

लिथुआनिया की राजधानी विलनियस में वार्षिक 'कॉर्गी रेस' और कॉस्ट्यूम परेड का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों कुत्तों ने हिस्सा लिया।

लिथुआनिया की राजधानी विलनियस की सड़कें हाल ही में एक बेहद ही अनोखे और मनोरंजक दृश्य की गवाह बनीं। यहाँ आयोजित वार्षिक 'कॉर्गी रेस' और कॉस्ट्यूम परेड में सैकड़ों कॉर्गी कुत्तों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस आयोजन ने न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों और सोशल मीडिया पर पशु प्रेमियों का भी भरपूर मनोरंजन किया। अपनी छोटी टांगों और चंचल स्वभाव के लिए मशहूर कॉर्गी नस्ल के इन कुत्तों ने दौड़ के मैदान में अपना हुनर दिखाया। इस प्रतियोगिता का मुख्य आकर्षण 'कॉर्गी कॉस्ट्यूम परेड' थी, जहाँ इन पालतू जानवरों को विभिन्न प्रकार की वेशभूषा में सजाया गया था। कुछ कुत्ते सुपरहीरो के लिबास में नजर आए, तो कुछ पारंपरिक लिथुआनियाई वेशभूषा में। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समुदाय के बीच भाईचारा बढ़ाना और पालतू जानवरों के प्रति प्रेम को बढ़ावा देना है। रेस के दौरान मालिकों का उत्साह भी देखने लायक था, जो अपने प्यारे दोस्तों को फिनिश लाइन तक पहुँचाने के लिए तरह-तरह के जतन कर रहे थे। अगर हम वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखें, तो कॉर्गी नस्ल का एक खास ऐतिहासिक महत्व है। दिवंगत ब्रिटिश महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के पसंदीदा होने के कारण इस नस्ल को 'शाही कुत्ते' का दर्जा प्राप्त है। राष्ट्रमंडल देशों, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में, कॉर्गी को बेहद सम्मान और प्यार के साथ पाला जाता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के बीच भी 'पेट कल्चर' यानी पालतू जानवरों को परिवार का हिस्सा मानने की प्रवृत्ति पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ी है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में अब भारतीय मूल के परिवारों में भी कॉर्गी जैसे छोटे और मिलनसार स्वभाव वाले कुत्ते आम तौर पर देखे जा सकते हैं। ऑस्ट्रेलियाई परिदृश्य में, इस तरह के आयोजन भारतीय प्रवासियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं। सिडनी में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले 'डॉग लवर्स फेस्टिवल' की तरह ही, विलनियस का यह आयोजन दिखाता है कि कैसे पालतू जानवर समुदायों को जोड़ने का काम करते हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय जो अक्सर सांस्कृतिक मेलजोल के नए तरीके तलाशता है, उनके लिए ये छोटे सदस्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि अकेलेपन को दूर करने और पड़ोसियों के साथ जुड़ने का एक बेहतरीन जरिया बन गए हैं। प्रतियोगिता के समापन पर विजेताओं को पुरस्कृत किया गया, लेकिन दर्शकों का मानना था कि इस दौड़ में भाग लेने वाला हर कॉर्गी अपने आप में विजेता था। लिथुआनिया के अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि अगले साल यह आयोजन और भी बड़े स्तर पर होगा, जिसमें पड़ोसी यूरोपीय देशों से भी लोग अपने पालतू जानवरों के साथ शिरकत करेंगे। यह आयोजन हमें याद दिलाता है कि भागदौड़ भरी जिंदगी में खुशियों के छोटे-छोटे पल, जैसे कि नन्हे पैरों की यह दौड़, मानसिक सुकून के लिए कितने आवश्यक हैं।
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