ऑस्ट्रेलिया
लिज्मोर बाढ़ की वो खौफनाक रात: जब मदद के इंतज़ार में बैठी केट के लिए 'देवदूत' बनकर आया एक जेट-स्की सवार
ICN24 Newsroom 12 जुल॰ 2026, 10:31 am
2022 की लिज्मोर बाढ़ में फंसी केट की जान एक आम नागरिक ने बचाई। उनकी यह कहानी अब एबीसी के एक नए डॉक्यूमेंट्री में दिखाई गई है।
न्यू साउथ वेल्स के लिज्मोर में साल 2022 में आई विनाशकारी बाढ़ की यादें आज भी स्थानीय लोगों के जहन में ताज़ा हैं। उस दौरान तबाही का मंजर ऐसा था कि सरकारी तंत्र और आपातकालीन सेवाएं भी असहाय नज़र आ रही थीं। इसी संकट के बीच केट नाम की एक महिला की जान बचाने की कहानी अब एक बार फिर चर्चा में है। केट उस समय अपनी जान बचाने के लिए घंटों से आपातकालीन सेवाओं (SES) का इंतज़ार कर रही थीं, लेकिन भारी दबाव के कारण मदद उन तक नहीं पहुँच पा रही थी। तभी एक अनजान व्यक्ति जेट-स्की पर सवार होकर उनकी मदद के लिए पहुँचा और उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले गया।
यह भावुक कहानी एबीसी (ABC) पर प्रसारित होने वाली एक नई स्वतंत्र डॉक्यूमेंट्री का हिस्सा है। इस डॉक्यूमेंट्री में उन गुमनाम नायकों और उत्तरजीवियों की आपबीती दिखाई गई है जिन्होंने 2022 की उस ऐतिहासिक बाढ़ का सामना किया था। केट बताती हैं कि जब पानी का स्तर तेज़ी से बढ़ रहा था, तो उन्हें लगा था कि शायद वह जीवित नहीं बचेंगी। आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर काम नहीं कर रहे थे और बचाव दल हर जगह पहुँचने में असमर्थ थे। ऐसे समय में आम नागरिकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक-दूसरे की मदद की।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह कहानी विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले प्रवासी अक्सर ऐसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समुदाय की शक्ति और एकजुटता को देखते आए हैं। लिज्मोर की इस घटना ने साबित किया कि संकट के समय केवल सरकारी मदद पर निर्भर रहना काफी नहीं होता, बल्कि पड़ोसी और स्थानीय नागरिक ही पहले उत्तरदाता (first responders) बनकर उभरते हैं। कई भारतीय प्रवासियों ने भी उस दौरान स्वयंसेवक के रूप में और दान देकर लिज्मोर समुदाय की मदद की थी।
डॉक्यूमेंट्री में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि कैसे जलवायु परिवर्तन के कारण अब बाढ़ जैसी घटनाएं पहले से कहीं अधिक तीव्र और अप्रत्याशित हो गई हैं। केट की कहानी महज़ एक रेस्क्यू की दास्तां नहीं है, बल्कि यह उस सरकारी विफलता और उसके बाद उपजी नागरिक एकता का प्रतीक है। लिज्मोर के लोगों का कहना है कि उस रात अगर आम लोग अपनी नावों और जेट-स्की के साथ बाहर नहीं निकलते, तो मरने वालों का आंकड़ा कहीं अधिक हो सकता था।
इस फिल्म के माध्यम से स्थानीय लोग चाहते हैं कि सरकार आपदा प्रबंधन की अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करे। भारतीय समुदाय के लिए, जो अक्सर सिडनी और मेलबर्न जैसे बड़े शहरों से बाहर क्षेत्रीय क्षेत्रों में भी बस रहे हैं, ऐसी आपदाओं के प्रति सजग रहना और सामुदायिक नेटवर्क को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है। यह डॉक्यूमेंट्री न केवल लिज्मोर के दर्द को बयां करती है, बल्कि मानवीय साहस को सलाम भी करती है।
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