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प्रधानाध्यापक का अनूठा श्रमदान: छुट्टी के दिन खुद सड़क के गड्ढे भरने उतरे शमशेर आलम

ICN24 Newsroom 10 अग॰ 2026, 08:37 pm
प्रधानाध्यापक का अनूठा श्रमदान: छुट्टी के दिन खुद सड़क के गड्ढे भरने उतरे शमशेर आलम

झारखंड के पाकुड़ में एक स्कूल के प्रधानाध्यापक शमशेर आलम ने छुट्टी के दिन जर्जर सड़क के गड्ढे भरकर समाज सेवा की एक नई मिसाल पेश की है।

झारखंड के पाकुड़ जिले से समाज सेवा और व्यक्तिगत जिम्मेदारी की एक ऐसी प्रेरक कहानी सामने आई है, जिसने शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के साथ-साथ नागरिक कर्तव्य का एक बड़ा उदाहरण पेश किया है। पाकुड़-राजग्राम मुख्य मार्ग पर बाहिरग्राम कांटा के समीप जर्जर हो चुकी सड़क और वहां बने जानलेवा गड्ढों से परेशान लोगों को राहत देने के लिए नबीनगर उत्क्रमित उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक शमशेर आलम ने अपनी छुट्टी के दिन को आराम करने के बजाय श्रमदान के लिए चुना। पाकुड़-राजग्राम मुख्य मार्ग इस क्षेत्र की जीवनरेखा माना जाता है, लेकिन लंबे समय से रखरखाव के अभाव में इसकी स्थिति बेहद दयनीय हो गई थी। विशेष रूप से बाहिरग्राम कांटा के पास सड़क पर इतने गहरे गड्ढे हो गए थे कि आए दिन वहां छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं होती रहती थीं। स्थानीय ग्रामीणों और यात्रियों ने कई बार इस समस्या की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की, लेकिन जब कोई समाधान नहीं निकला, तो प्रधानाध्यापक शमशेर आलम ने खुद मोर्चा संभालने का फैसला किया। रविवार की छुट्टी होने के बावजूद, आलम सुबह ही फावड़ा और जरूरी सामग्री लेकर सड़क पर उतर आए। उन्होंने घंटों कड़ी मेहनत कर सड़क के बीचों-बीच बने खतरनाक गड्ढों को पत्थर और मिट्टी से भरा। उन्हें अकेले काम करते देख कई स्थानीय लोग भी प्रभावित हुए और उनकी इस पहल की सराहना की। आलम का मानना है कि केवल सरकार या प्रशासन को दोष देने से समस्याओं का समाधान नहीं होता; कई बार हमें समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए स्वयं आगे आना पड़ता है। यह घटना न केवल एक शिक्षक के सेवा भाव को दर्शाती है, बल्कि उन प्रवासी भारतीयों के लिए भी एक भावनात्मक संदेश है जो अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं। ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में बसे भारतीय समुदाय के लोग अक्सर भारत में बुनियादी ढांचे की समस्याओं को लेकर चिंतित रहते हैं। शमशेर आलम जैसे व्यक्ति यह साबित करते हैं कि ग्रासरूट स्तर पर बदलाव लाने के लिए इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। प्रधानाध्यापक की इस पहल ने सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा बटोरी है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जहां एक ओर बड़े-बड़े अधिकारी और जनप्रतिनिधि इन गड्ढों से अनजान बने रहे, वहीं एक शिक्षक ने अपनी मेहनत से राहगीरों का सफर आसान कर दिया। शमशेर आलम की इस सादगी और कर्तव्यनिष्ठा ने उन्हें पूरे जिले में एक 'रोल मॉडल' के रूप में स्थापित कर दिया है। नबीनगर उत्क्रमित उच्च विद्यालय के छात्रों के लिए भी उनके प्रधानाध्यापक का यह कार्य किसी किताबी पाठ से कहीं अधिक प्रभावशाली साबित हुआ है।
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