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कुशीनगर: बिना एनओसी नहर की पटरी पर बिछाई गई इंटरलॉकिंग, प्रशासनिक कार्यशैली पर उठे सवाल
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 08:07 am

कुशीनगर में सिंचाई विभाग की अनुमति के बिना नहर की पटरी पर इंटरलॉकिंग कार्य कराए जाने का मामला सामने आया है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद से सरकारी धन के बंदरबांट और प्रशासनिक लापरवाही का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। यहाँ सिंचाई विभाग की पूर्व अनुमति (NOC) के बिना ही नहर की पटरी पर इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछाने का कार्य करा दिया गया। इस अनियमितता के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नियमों के अनुसार, किसी भी विभाग की भूमि पर कोई भी निर्माण कार्य शुरू करने से पहले उस विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होता है। विशेष रूप से नहरों और जलमार्गों के किनारे सुरक्षा और रखरखाव की दृष्टि से सिंचाई विभाग के कड़े मानक होते हैं। कुशीनगर के इस मामले में, विकास खंड स्तर से कराए गए इस कार्य के लिए सिंचाई विभाग को विश्वास में नहीं लिया गया। जब विभाग के अधिकारियों को इसकी भनक लगी, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि इस निर्माण के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई थी।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह इंटरलॉकिंग कार्य लाखों रुपये की लागत से कराया गया है। जानकारों का कहना है कि नहर की पटरियों पर इस तरह का पक्का निर्माण भविष्य में नहर की सफाई और चौड़ीकरण कार्य में बाधा उत्पन्न कर सकता है। अक्सर देखा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बजट खपाने के फेर में ग्राम पंचायतों या क्षेत्र पंचायतों द्वारा ऐसे स्थानों पर निर्माण करा दिया जाता है, जो तकनीकी रूप से उचित नहीं होते।
इस घटनाक्रम ने भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की चर्चाओं को भी हवा दे दी है। आरोप लग रहे हैं कि ठेकेदारों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से बिना कागजी औपचारिकताएं पूरी किए जल्दबाजी में काम कराया गया ताकि भुगतान प्राप्त किया जा सके। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच की बात कही है। उन्होंने संकेत दिया है कि यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो न केवल निर्माण कार्य को अवैध माना जाएगा, बल्कि संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भी लिखा जाएगा।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भारत में बुनियादी ढांचे के विकास की खबरें महत्वपूर्ण होती हैं, क्योंकि कई प्रवासी अपने पैतृक गांवों में निवेश और सुधार की उम्मीद रखते हैं। हालांकि, इस तरह की प्रशासनिक खामियां और पारदर्शिता की कमी सुशासन के दावों पर सवालिया निशान लगाती हैं। कुशीनगर के नागरिकों ने अब जिलाधिकारी से इस मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि सार्वजनिक धन की बर्बादी रोकी जा सके।
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