टेक्नोलॉजी
जेम्स वेब टेलीस्कोप का कमाल: HD 80606 b ग्रह पर कुछ ही घंटों में बढ़ा 1,100 डिग्री तापमान
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 03:30 pm

नासा के जेम्स वेब टेलीस्कोप ने HD 80606 b नामक एक अनोखे ग्रह पर तापमान में भारी उछाल दर्ज किया है, जो ब्रह्मांडीय मौसम की चरम स्थिति को दर्शाता है।
नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) ने एक बार फिर खगोल विज्ञान की दुनिया में तहलका मचा दिया है। हालिया टिप्पणियों में, इस शक्तिशाली दूरबीन ने एक दूरस्थ सौर मंडल में स्थित विशाल गैस दानव (Gas Giant) ग्रह 'HD 80606 b' के वातावरण में होने वाले भीषण परिवर्तन को कैद किया है। वैज्ञानिकों ने पाया कि यह ग्रह अपने तारे के बेहद करीब से गुजरते समय मात्र कुछ ही घंटों के भीतर 1,100 डिग्री सेल्सियस से अधिक गर्म हो गया। यह खोज ब्रह्मांड में मौजूद चरम स्थितियों और वायुमंडलीय गतिशीलता को समझने की दिशा में एक मील का पत्थर मानी जा रही है।
HD 80606 b पृथ्वी से लगभग 190 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है और इसका द्रव्यमान हमारे सौर मंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति से लगभग चार गुना अधिक है। इस ग्रह की सबसे अनोखी विशेषता इसकी कक्षा (orbit) है। अधिकांश ग्रहों की कक्षा गोलाकार होती है, लेकिन HD 80606 b की कक्षा एक धूमकेतु की तरह अत्यधिक अंडाकार है। यह ग्रह अपना अधिकांश समय अपने मेजबान तारे से काफी दूर बिताता है, लेकिन अपनी कक्षा के दौरान यह अचानक तारे के बहुत करीब आ जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि यह हमारे सौर मंडल में होता, तो इसकी दूरी सूर्य और बुध के बीच की दूरी से भी कम होती।
जेम्स वेब टेलीस्कोप के मिड-इन्फ्रारेड इंस्ट्रूमेंट (MIRI) का उपयोग करते हुए, खगोलविदों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने इस 'फ्लैश-हीटिंग' घटना का अध्ययन किया। जैसे ही ग्रह अपने तारे के करीब पहुंचा, इसकी ऊर्जा का स्तर तेजी से बढ़ा। शोधकर्ताओं ने बताया कि कुछ ही घंटों में तापमान 500 डिग्री सेल्सियस से बढ़कर 1,600 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया। यह तापमान इतना अधिक है कि लोहा भी पिघल सकता है। इस तीव्र गर्मी के कारण ग्रह के वातावरण में भीषण तूफान और प्रचंड हवाएं चलती हैं, जिनकी गति हजारों मील प्रति घंटे हो सकती है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय और विज्ञान प्रेमियों के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया की विभिन्न यूनिवर्सिटीज और अनुसंधान केंद्र अक्सर नासा के इन मिशनों में महत्वपूर्ण डेटा विश्लेषण का योगदान देते हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में भारतीय मूल के कई वैज्ञानिक और छात्र खगोल भौतिकी (Astrophysics) के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। इस तरह की खोजें न केवल ब्रह्मांड के प्रति हमारी समझ को बढ़ाती हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों को भी प्रेरित करती हैं।
इस अध्ययन के मुख्य निष्कर्षों से यह भी पता चला है कि HD 80606 b का वातावरण उतना घना नहीं है जितना पहले सोचा गया था। JWST के डेटा ने वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद की है कि ग्रह की सतह और वायुमंडल इतनी तेजी से गर्म होने वाली ऊर्जा को कैसे अवशोषित और पुनर्वितरित करते हैं। यह जानकारी अन्य 'हॉट जुपिटर' (Hot Jupiters) के वर्गीकरण और उनके विकास क्रम को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भविष्य में, जेम्स वेब टेलीस्कोप इसी तरह के अन्य ग्रहों का अध्ययन जारी रखेगा, जिससे हमें यह जानने में मदद मिलेगी कि क्या पृथ्वी के अलावा भी कहीं जीवन की संभावनाओं के लिए अनुकूल वातावरण मौजूद हो सकता है।
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