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जेएसडब्ल्यू स्टील ने टिन प्लेट विस्तार के लिए योगीजी डिगी के साथ किया करार; घरेलू निर्माण को मिलेगा बढ़ावा
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 03:09 am
जेएसडब्ल्यू स्टील ने अपनी 0.2 मिलियन टन वार्षिक क्षमता वाली टिन प्लेट विस्तार परियोजना के लिए योगीजी डिगी को डिजाइन और इंजीनियरिंग का काम सौंपा है।
भारत की सबसे बड़ी स्टील निर्माता कंपनियों में से एक, जेएसडब्ल्यू स्टील (JSW Steel), ने अपनी महत्वाकांक्षी टिन प्लेट विस्तार परियोजना के लिए इंजीनियरिंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनी योगीजी डिगी (Yogiji Digi) को महत्वपूर्ण अनुबंध प्रदान किए हैं। यह परियोजना भारत के स्टील क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
इस अनुबंध के तहत, योगीजी डिगी को 0.2 मिलियन टन प्रति वर्ष (TPA) की क्षमता वाली टिन प्लेट विस्तार परियोजना के लिए डिजाइन, इंजीनियरिंग, आपूर्ति और कमीशनिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विशेष रूप से, कंपनी एक अत्याधुनिक 'सिक्स-हाई रिवर्सिंग मिल' (six-high reversing mill) और 'ट्विन-स्टैंड डबल कोल्ड रिडक्शन' (DCR) मिल का निर्माण और पर्यवेक्षण करेगी। ये तकनीकें उच्च गुणवत्ता वाली टिन प्लेटों के उत्पादन के लिए अनिवार्य हैं, जिनका उपयोग मुख्य रूप से खाद्य पैकेजिंग, पेय पदार्थों के कैन और अन्य औद्योगिक अनुप्रयोगों में किया जाता है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह समाचार विशेष महत्व रखता है, क्योंकि भारत के बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास में हो रही प्रगति वैश्विक स्तर पर भारतीय कंपनियों की साख बढ़ा रही है। ऑस्ट्रेलिया में बसे कई प्रवासी भारतीय इंजीनियर और निवेशक भारत के औद्योगिक परिदृश्य, विशेष रूप से जेएसडब्ल्यू जैसे प्रमुख स्टॉक, पर पैनी नजर रखते हैं। भारत में इस तरह के तकनीकी विस्तार से न केवल रोजगार के अवसर पैदा होते हैं, बल्कि यह 'मेक इन इंडिया' अभियान को भी मजबूती प्रदान करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस साझेदारी से जेएसडब्ल्यू स्टील की 'डाउनस्ट्रीम' प्रोसेसिंग क्षमताओं में काफी सुधार होगा। टिन प्लेट की मांग भारत में तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि उपभोक्ता बाजार और पैकेज्ड फूड सेक्टर का विस्तार हो रहा है। वर्तमान में, भारत अपनी टिन प्लेट की आवश्यकताओं का एक हिस्सा आयात करता है, लेकिन इस विस्तार के बाद देश आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ेगा।
योगीजी डिगी के लिए यह प्रोजेक्ट एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि यह जटिल मेटलर्जिकल मशीनरी के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता को प्रमाणित करता है। अनुबंध में न केवल मशीनों की आपूर्ति शामिल है, बल्कि निर्माण की निगरानी और संचालन की शुरुआत (कमीशनिंग) तक की पूरी प्रक्रिया का प्रभार योगीजी डिगी के पास होगा।
कुल मिलाकर, यह परियोजना भारत की स्टील क्षमता को वैश्विक मानकों के करीब ले जाने और भविष्य की औद्योगिक मांगों को पूरा करने के लिए एक रणनीतिक निवेश है। इससे भारत के विनिर्माण क्षेत्र की मजबूती का संदेश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, जिसमें ऑस्ट्रेलिया का महत्वपूर्ण व्यापारिक बाजार भी शामिल है, और अधिक स्पष्ट होगा।
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