राजनीति
झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद: छात्रों का उग्र प्रदर्शन, विधानसभा घेराव की दी चेतावनी
ICN24 Newsroom 3 अग॰ 2026, 06:37 am

झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है, प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा घेराव की धमकी दी है।
झारखंड में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर चल रहा विवाद अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक संकट का रूप लेता जा रहा है। राज्य के हजारों प्रतियोगी छात्र सड़कों पर उतर आए हैं और उन्होंने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो वे झारखंड विधानसभा का घेराव करेंगे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि राज्य कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली और पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, जिससे ईमानदार छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।
राजधानी रांची के मोहराबादी मैदान और अन्य प्रमुख स्थलों पर जुटे छात्रों ने सरकार विरोधी नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे छात्र नेताओं का कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे थे, लेकिन प्रशासन और सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। उनकी मुख्य मांगों में हाल की परीक्षाओं की सीबीआई (CBI) जांच कराना, चयन प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करना और पेपर लीक में शामिल भू-माफियाओं और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानून के तहत कार्रवाई करना शामिल है।
यह विवाद केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर सात समंदर पार ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय पर भी पड़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया में बसे कई प्रवासी भारतीय अपने छोटे भाई-बहनों और रिश्तेदारों की शिक्षा और कोचिंग का खर्च उठाते हैं। झारखंड जैसे राज्यों में भर्ती परीक्षाओं में होने वाली देरी और धांधली के कारण इन परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। मेलबर्न और सिडनी में रहने वाले झारखंडी मूल के निवासियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों के प्रति एकजुटता दिखाई है, क्योंकि घर वापसी पर वे अक्सर अपने परिजनों को इसी मानसिक तनाव से जूझते हुए देखते हैं।
झारखंड सरकार ने इस मामले में बचाव करते हुए कहा है कि वह निष्पक्ष परीक्षा आयोजित करने के लिए प्रतिबद्ध है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, छात्र इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। विधानसभा के घेराव की धमकी ने सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया है, और राजधानी में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह मुद्दा जल्द नहीं सुलझा, तो आगामी चुनावों में यह सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
छात्रों का तर्क है कि बार-बार परीक्षा रद्द होने से उनकी उम्र सीमा निकलती जा रही है और वे बेरोजगारी के चक्रव्यूह में फंसते जा रहे हैं। उनका कहना है कि 'सशक्त झारखंड' का सपना तभी पूरा होगा जब राज्य की प्रतिभाओं को बिना किसी भ्रष्टाचार के रोजगार के अवसर मिलेंगे। फिलहाल, सभी की निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इस असंतोष को शांत करने के लिए क्या नीति अपनाती है।
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