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लद्दाख में भूमि उपयोग अधिकारों का विकेंद्रीकरण: स्थानीय प्रशासन को मिली विकास परियोजनाओं की कमान

ICN24 Newsroom 3 अग॰ 2026, 05:37 am
लद्दाख में भूमि उपयोग अधिकारों का विकेंद्रीकरण: स्थानीय प्रशासन को मिली विकास परियोजनाओं की कमान

लद्दाख प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए भूमि उपयोग के प्रस्तावों को मंजूरी देने की शक्तियां मुख्य सचिव और संभागीय आयुक्त को सौंप दी हैं।

लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से वहां के प्रशासनिक ढांचे में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखे जा रहे हैं। इसी कड़ी में, एक बड़ा कदम उठाते हुए लद्दाख के उपराज्यपाल कार्यालय ने भूमि उपयोग के प्रस्तावों को मंजूरी देने की शक्तियों का विकेंद्रीकरण कर दिया है। अब नगर निकायों की सीमा से बाहर होने वाली विकास परियोजनाओं के लिए भूमि उपयोग की मंजूरी देने का अधिकार मुख्य सचिव और संभागीय आयुक्त (डिवीजनल कमिश्नर) के पास होगा। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में होने वाली देरी को कम करना और लद्दाख के दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को गति देना है। अब तक, कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को भूमि आवंटन और उपयोग परिवर्तन के लिए लंबी नौकरशाही प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था, जिससे अक्सर परियोजनाओं की लागत बढ़ जाती थी और समय सीमा का उल्लंघन होता था। नई व्यवस्था के तहत, मुख्य सचिव और संभागीय आयुक्त को उन क्षेत्रों में भूमि उपयोग प्रस्तावों पर निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया गया है जो स्थानीय नगरपालिका समितियों के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। यह कदम विशेष रूप से पर्यटन, ऊर्जा और परिवहन जैसे क्षेत्रों में निवेश और विकास को बढ़ावा देने वाला माना जा रहा है। लद्दाख जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में, समय पर निर्णय लेना विकास की पहली शर्त है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेष रूप से वे जो लद्दाख और जम्मू-कश्मीर मूल के हैं, इस घटनाक्रम को बारीकी से देख रहे हैं। प्रवासी भारतीयों के लिए अपने गृह क्षेत्र में भूमि नियम और प्रशासनिक सुगमता हमेशा से एक महत्वपूर्ण विषय रही है। कई अनिवासी भारतीय (NRI) अपने पैतृक गांवों में छोटे स्तर पर निवेश या विकास कार्यों में रुचि रखते हैं, और प्रशासनिक सरलीकरण ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विकेंद्रीकरण से न केवल स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि यह स्थानीय लोगों की जरूरतों के अनुसार निर्णय लेने की क्षमता भी प्रदान करेगा। 2019 में लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिए जाने के बाद से वहां के निवासी अधिक स्वायत्तता और प्रशासनिक सुधारों की मांग कर रहे हैं। हालांकि यह बदलाव सीधे तौर पर छठी अनुसूची जैसी मांगों को पूरा नहीं करता, लेकिन यह प्रशासनिक स्तर पर स्थानीय अधिकारियों को सशक्त बनाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। आने वाले समय में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये अधिकारी अपनी नई शक्तियों का उपयोग कितनी कुशलता से करते हैं। भूमि लद्दाख में एक संवेदनशील मुद्दा है, क्योंकि यहां की पारिस्थितिकी तंत्र अत्यंत नाजुक है। इसलिए, विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल, इस फैसले को लालफीताशाही कम करने और लद्दाख के भविष्य को संवारने की दिशा में एक प्रगतिशील कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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