ऑस्ट्रेलिया
जापानी राजदूत ने अल्बनीज का किया बचाव, 'खरबूजा विवाद' पर लगाया विराम
ICN24 Newsroom 12 अग॰ 2026, 08:37 pm
जापानी राजदूत काजुहिरो सुजुकी ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री अल्बनीज की टिप्पणियों से जापान को कोई ठेस नहीं पहुंची है, जिससे घरेलू राजनीतिक विवाद पर विराम लग गया है।
ऑस्ट्रेलिया में जापान के राजदूत काजुहिरो सुजुकी ने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के पक्ष में खड़े होते हुए उस विवाद को शांत करने का प्रयास किया है, जिसे स्थानीय मीडिया में 'खरबूजा विवाद' (melon drama) कहा जा रहा है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री अल्बनीज ने जापान में मिलने वाले महंगे खरबूजों की कीमत को लेकर कुछ टिप्पणी की थी। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया की विपक्षी पार्टियों, विशेष रूप से 'वन नेशन' और 'कोअलिशन' (Coalition) ने इसे जापान का अपमान बताते हुए प्रधानमंत्री से सार्वजनिक माफी की मांग की थी।
विपक्षी दलों ने दावा किया था कि अल्बनीज की टिप्पणियों से जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची और वहां की जनता की भावनाओं को ठेस पहुंची है। हालांकि, जापानी राजदूत ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। राजदूत सुजुकी ने स्पष्ट किया कि जापान ने इन टिप्पणियों को किसी भी तरह से अपमानजनक नहीं माना है और दोनों देशों के बीच संबंध पहले की तरह ही मजबूत और सौहार्दपूर्ण बने हुए हैं।
यह मामला तब गरमाया जब वन नेशन पार्टी ने संसद में इस मुद्दे को उठाया और सरकार पर अंतरराष्ट्रीय शिष्टाचार का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने तर्क दिया कि जापान ऑस्ट्रेलिया का एक प्रमुख रणनीतिक और व्यापारिक भागीदार है, और ऐसे में प्रधानमंत्री का हल्का व्यवहार द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन राजदूत के हालिया स्पष्टीकरण ने इन सभी कयासों पर विराम लगा दिया है। सुजुकी ने कहा कि जापान ऑस्ट्रेलिया के साथ अपने गहरे संबंधों को महत्व देता है और इस तरह की बातों को तूल देने की कोई आवश्यकता नहीं है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह घटनाक्रम कूटनीतिक शिष्टाचार और राजनीतिक पैंतरेबाज़ी के बीच के अंतर को समझने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। दक्षिण एशियाई संस्कृतियों की तरह जापान में भी उपहार देने और फलों की गुणवत्ता का विशेष महत्व होता है। भारतीय समुदाय, जो स्वयं अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और 'अतिथि देवो भव' की भावना के लिए जाना जाता है, अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ऐसे सूक्ष्म व्यवहारों को बारीकी से देखता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया और जापान, भारत के साथ मिलकर 'क्वाड' (Quad) गठबंधन का हिस्सा हैं, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता के लिए काम करता है। ऐसे में किसी भी छोटे विवाद को राजनीतिक रंग देना गठबंधन की मजबूती के लिए उचित नहीं है। राजदूत के इस कदम को एक परिपक्व कूटनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है, जिसने न केवल प्रधानमंत्री अल्बनीज को राहत दी है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया है कि घरेलू राजनीति अंतरराष्ट्रीय संबंधों के आड़े न आए।
अंततः, जापानी राजदूत के हस्तक्षेप ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक कूटनीति में आपसी समझ और विश्वास किसी भी छिटपुट विवाद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। विपक्षी दलों की माफी की मांग अब कमजोर पड़ती नजर आ रही है, क्योंकि स्वयं जापान ने किसी भी तरह की नाराजगी से इनकार कर दिया है।
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