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जापान बना रहा है अपनी पहली केंद्रीय खुफिया एजेंसी, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से मिल रही है मदद

ICN24 Newsroom 13 जुल॰ 2026, 07:31 pm
जापान बना रहा है अपनी पहली केंद्रीय खुफिया एजेंसी, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से मिल रही है मदद

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार जापान एक शक्तिशाली केंद्रीय खुफिया इकाई स्थापित कर रहा है, जिसमें उसे ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों का सहयोग मिल रहा है।

टोक्यो और वाशिंगटन से आई रिपोर्टों के अनुसार, जापान द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार एक पूर्ण विकसित और केंद्रीकृत खुफिया एजेंसी स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठा रहा है। न्यू यॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जापानी सरकार अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका और जर्मनी जैसे अपने प्रमुख पश्चिमी सहयोगियों से तकनीकी और रणनीतिक मार्गदर्शन ले रही है। यह कदम मुख्य रूप से चीन, रूस और उत्तर कोरिया से उत्पन्न होने वाले बढ़ते क्षेत्रीय सुरक्षा खतरों का मुकाबला करने के लिए उठाया जा रहा है। जापान की वर्तमान खुफिया प्रणाली काफी हद तक विकेंद्रीकृत है, जहां विभिन्न विभाग अलग-अलग सूचनाएं एकत्र करते हैं। हालांकि, बदलते वैश्विक परिदृश्य और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों को देखते हुए, प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा के नेतृत्व वाली सरकार (जिसमें आर्थिक सुरक्षा मंत्री सानाए ताकाइची की महत्वपूर्ण भूमिका है) एक ऐसी संस्था चाहती है जो सूचनाओं का विश्लेषण कर सके और देश की सुरक्षा नीति को दिशा दे सके। ऑस्ट्रेलिया की इसमें भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों देश 'क्वाड' (Quad) के सदस्य हैं और समुद्री सुरक्षा साझा करते हैं। ऑस्ट्रेलियाई भारतवंशी समुदाय के लिए यह खबर काफी मायने रखती है। भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान मिलकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए काम कर रहे हैं। जापान की खुफिया क्षमता में वृद्धि का सीधा अर्थ है कि क्षेत्र में लोकतांत्रिक देशों का गठबंधन और अधिक मजबूत होगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जापान अपनी खुफिया जानकारी साझा करने की प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित कर लेता है, तो भविष्य में वह 'फाइव आइज' (Five Eyes) जैसे खुफिया गठबंधन के साथ और भी निकटता से काम कर सकेगा। हालांकि, इस नई एजेंसी की राह में कई चुनौतियां भी हैं। जापान में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से ही सैन्य और खुफिया गतिविधियों को लेकर एक प्रकार की सांस्कृतिक और कानूनी हिचकिचाहट रही है। गोपनीयता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर वहां के नागरिक समाज में तीखी बहस छिड़ सकती है। इसके बावजूद, चीन की आक्रामक विदेश नीति और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद उपजे वैश्विक तनाव ने जापान को अपनी रक्षा रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। यह नया विकास न केवल जापान के लिए बल्कि ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसे साझेदारों के लिए भी सुरक्षा के नए द्वार खोलेगा। सिडनी और मेलबर्न में रह रहे भारतीय समुदाय के पेशेवर, जो अक्सर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और व्यापारिक सुरक्षा पर नजर रखते हैं, इस रणनीतिक बदलाव को हिंद-प्रशांत में एक संतुलित शक्ति समीकरण के रूप में देख रहे हैं।
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