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जालंधर में मासूम से दरिंदगी: 50 टांके और 4 ऑपरेशन के बाद भी इंसाफ का इंतजार, परिवार ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा

ICN24 Newsroom 14 अग॰ 2026, 07:38 pm
जालंधर में मासूम से दरिंदगी: 50 टांके और 4 ऑपरेशन के बाद भी इंसाफ का इंतजार, परिवार ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा

साल 2022 में जालंधर में एक मासूम बच्ची के साथ हुई हैवानियत के मामले में पीड़ित परिवार ने अब न्याय के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया है।

जालंधर: पंजाब के जालंधर से दो साल पहले सामने आई एक ऐसी रूह कंपा देने वाली वारदात आज भी समाज के माथे पर कलंक बनी हुई है। साल 2022 में एक मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और बर्बरता के मामले में अब तक ठोस कार्रवाई न होने से आहत होकर पीड़ित परिवार ने न्याय की गुहार लगाते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि भारतीय न्याय प्रणाली की सुस्त रफ़्तार और पुलिसिया कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। घटना का विवरण इतना भयावह है कि किसी का भी दिल दहल जाए। साल 2022 में आरोपी ने मासूम बच्ची को पपीते का लालच देकर उसे अपनी हवस का शिकार बनाया था। आरोपी की दरिंदगी यहीं नहीं रुकी; उसने बच्ची के साथ इस कदर बर्बरता की कि उसे गंभीर हालत में एक बोरी में भरकर फेंक दिया गया था। जब बच्ची मिली, तो उसकी हालत अत्यंत नाजुक थी। डॉक्टरों को उसके नाजुक अंगों पर आए जख्मों को भरने के लिए करीब 50 टांके लगाने पड़े और उसे चार बड़े ऑपरेशनों से गुजरना पड़ा। महीनों तक चले इलाज के बाद बच्ची की जान तो बच गई, लेकिन उस खौफनाक दिन के निशान उसके मन और शरीर पर आज भी गहरे हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के इतने समय बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपी अभी तक कानून की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस की ढीली जांच और स्थानीय स्तर पर न्याय की उम्मीद धुंधली होते देख परिवार ने अब उच्च न्यायालय की शरण ली है। याचिका में निष्पक्ष जांच और आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की गई है। परिवार का कहना है कि वे पिछले दो सालों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है। इस मामले ने ऑस्ट्रेलिया में बसे प्रवासी भारतीय समुदाय के बीच भी गहरी चिंता पैदा कर दी है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय मूल के लोग अक्सर भारत में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करते रहे हैं। आईएनसी24 (ICN24) से बात करते हुए समुदाय के कुछ सदस्यों ने कहा कि जब तक ऐसे जघन्य अपराधों में त्वरित न्याय (Fast-track justice) सुनिश्चित नहीं होगा, तब तक समाज में अपराधियों के मन में डर पैदा नहीं होगा। प्रवासियों का मानना है कि पंजाब सरकार को इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर देखना चाहिए ताकि पीड़ित बच्ची को सही मायने में न्याय मिल सके। फिलहाल, हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई लंबित है। कानून के जानकारों का मानना है कि उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में पुलिस पर दबाव बढ़ेगा और जांच में तेजी आने की संभावना है। मासूम बच्ची और उसके माता-पिता के लिए यह लड़ाई लंबी जरूर है, लेकिन हाईकोर्ट से मिली उम्मीद की किरण ने उनकी न्याय की आस को फिर से जीवित कर दिया है।
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