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खड़गे प्रकरण पर भड़के राजेंद्रपाल गौतम, भाजपा-आरएसएस पर लगाया ‘छुआछूत की मानसिकता’ का आरोप
ICN24 Newsroom 14 अग॰ 2026, 07:37 pm

आम आदमी पार्टी के नेता राजेंद्रपाल गौतम ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ हुए कथित व्यवहार को लेकर भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला है।
भारतीय राजनीति में सामाजिक न्याय और जातिगत पहचान का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ हुए एक हालिया राजनीतिक घटनाक्रम ने विपक्षी खेमे को लामबंद कर दिया है। इस विवाद में अब आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री राजेंद्रपाल गौतम भी कूद पड़े हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि इन संगठनों के भीतर आज भी दलितों और पिछड़ों के प्रति भेदभाव का जहर भरा हुआ है।
राजेंद्रपाल गौतम ने अपने बयान में कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे कद्दावर नेता के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह देश के करोड़ों दलितों और शोषितों के आत्मसम्मान पर चोट है। उन्होंने तर्क दिया कि जब भी कोई दलित नेता अपनी योग्यता के दम पर शीर्ष स्थान पर पहुंचता है, तो सत्ताधारी दल की 'सामंती सोच' उसे स्वीकार नहीं कर पाती। गौतम के अनुसार, भाजपा और आरएसएस की विचारधारा अभी भी पुरानी वर्ण व्यवस्था की बेड़ियों से आजाद नहीं हो पाई है, जिसका सीधा असर देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर पड़ रहा है।
दिल्ली की राजनीति से लेकर देश के अन्य हिस्सों तक इस बयान ने हलचल पैदा कर दी है। गौतम ने आगे कहा कि जो लोग 'सांस्कृतिक राष्ट्रवाद' की बात करते हैं, वे असल में समाज में असमानता को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आज के आधुनिक भारत में भी किसी व्यक्ति की जाति उसके सम्मान का पैमाना तय करेगी? खड़गे प्रकरण को केवल एक व्यक्तिगत अपमान न मानकर उन्होंने इसे एक व्यापक सामाजिक समस्या के रूप में प्रस्तुत किया है।
इस राजनीतिक घमासान का असर न केवल भारत में बल्कि विदेशों में रह रहे भारतीय समुदाय पर भी देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासियों के बीच भी भारत की सामाजिक स्थिरता और समावेशी विकास को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में सक्रिय भारतीय समुदाय भारत के इन आंतरिक घटनाक्रमों को बारीकी से देखता है क्योंकि यह भारत की वैश्विक छवि को प्रभावित करते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों में जातिगत जनगणना और सामाजिक न्याय के मुद्दे प्रमुख रहने वाले हैं। राजेंद्रपाल गौतम का यह हमला इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य बहुजन समाज को एकजुट करना है। दूसरी ओर, भाजपा की ओर से भी इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया आने की उम्मीद है, जिससे आने वाले दिनों में यह वैचारिक टकराव और अधिक बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। फिलहाल, खड़गे प्रकरण ने भारतीय लोकतंत्र के भीतर छिपी सामाजिक दरारों को एक बार फिर बहस के केंद्र में ला दिया है।
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