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'जेल भरो आंदोलन' क्या है? किसान और मजदूर सड़कों पर क्यों उतरे हैं? जानें उनकी मुख्य मांगें
ICN24 Newsroom 11 अग॰ 2026, 06:38 pm

भारत के 1,000 से अधिक स्थानों पर किसान और मजदूर 'जेल भरो आंदोलन' के तहत गिरफ्तारियां दे रहे हैं। जानिए न्यूनतम वेतन और MSP जैसी उनकी प्रमुख मांगें क्या हैं।
भारत एक बार फिर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों का गवाह बन रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में 'जेल भरो आंदोलन' के तहत हजारों किसानों, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, खेतिहर मजदूरों और छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर गिरफ्तारियां दी हैं। यह विरोध प्रदर्शन अब तक भारत के लगभग 1,000 से अधिक स्थानों पर आयोजित किया जा चुका है, जो सरकार की आर्थिक और श्रम नीतियों के खिलाफ बढ़ते असंतोष को दर्शाता है।
इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य सरकार पर अपनी मांगों को मानने के लिए दबाव बनाना है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि मौजूदा नीतियां कॉर्पोरेट जगत को लाभ पहुँचा रही हैं, जबकि आम मजदूर और किसान कर्ज और महंगाई के बोझ तले दबे हुए हैं। जेल भरो आंदोलन एक अहिंसक नागरिक अवज्ञा का रूप है, जहाँ प्रदर्शनकारी स्वेच्छा से पुलिस को अपनी गिरफ्तारी देते हैं ताकि जेलें भर जाएं और प्रशासन को उनकी बात सुनने पर मजबूर होना पड़े।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में सबसे ऊपर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लिए कानूनी गारंटी है। किसानों का कहना है कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार उन्हें अपनी फसलों का उचित दाम मिलना चाहिए। इसके साथ ही, असंगठित क्षेत्र के श्रमिक न्यूनतम वेतन में वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने निजीकरण की प्रक्रिया को रोकने और अग्निपथ जैसी योजनाओं को वापस लेने की भी अपील की है, जिससे छात्रों और युवाओं में भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भारत में हो रहे ये घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण हैं। यहाँ रहने वाले कई प्रवासी भारतीय पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कृषि प्रधान क्षेत्रों से आते हैं। भारत में उनके परिवारों की आजीविका सीधे तौर पर इन कृषि नीतियों और आर्थिक बदलावों से जुड़ी हुई है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में भारतीय प्रवासियों के बीच इन विरोध प्रदर्शनों को लेकर काफी चर्चा हो रही है, क्योंकि यह न केवल उनके आर्थिक हितों को प्रभावित करता है, बल्कि उनके पैतृक गांवों की सामाजिक स्थिरता को भी प्रभावित करता है।
फिलहाल, सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध बना हुआ है। जहां प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था का हवाला दे रहा है, वहीं आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी बुनियादी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह संघर्ष जारी रहेगा। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या केंद्र सरकार बातचीत के जरिए इस संकट का समाधान निकालती है या यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा।
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